ईरान जंग पर बदले अमेरिका के तेवर, 10 दिन में ही सुलह की बात करने लगे ट्रंप

KNEWS DESK – ईरान पर हमले के करीब दस दिन बाद अमेरिका के भीतर इस युद्ध को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कई करीबी सलाहकारों ने उन्हें ईरान के साथ टकराव को जल्द खत्म करने और सुलह का रास्ता तलाशने की सलाह दी है। उनका मानना है कि अगर यह युद्ध लंबा खिंचता है तो इसका राजनीतिक, आर्थिक और सैन्य नुकसान अमेरिका को ही उठाना पड़ सकता है।

सलाहकारों की चेतावनी

वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार ट्रंप के सलाहकारों ने साफ कहा है कि मौजूदा हालात में ईरान के खिलाफ जारी सैन्य कार्रवाई से अमेरिका को कोई ठोस फायदा मिलता नहीं दिख रहा है। उल्टा अगर संघर्ष लंबा चलता है तो इससे रिपब्लिकन समर्थकों में नाराजगी बढ़ सकती है।

अमेरिका में इसी साल के अंत में मिडटर्म चुनाव होने हैं, ऐसे में सलाहकारों का मानना है कि लंबा युद्ध ट्रंप की पार्टी के लिए राजनीतिक रूप से नुकसानदेह साबित हो सकता है।

क्यों मुश्किल में फंसा अमेरिका?

जंग की शुरुआत में अमेरिका का लक्ष्य ईरान में सत्ता परिवर्तन कराना बताया जा रहा था। इसी रणनीति के तहत शुरुआती दिनों में कई बड़े सैन्य हमले किए गए। रिपोर्ट्स के मुताबिक हमलों में ईरान के कई वरिष्ठ कमांडरों को निशाना बनाया गया और शीर्ष नेतृत्व को कमजोर करने की कोशिश की गई।

हालांकि इन हमलों के बावजूद ईरान की सरकार और सैन्य ढांचा पूरी तरह टूटता हुआ नजर नहीं आया। यही वजह है कि अमेरिका की रणनीति पर अब सवाल उठने लगे हैं।

खुफिया रिपोर्ट ने भी बढ़ाई चिंता

एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक अमेरिकी नेशनल इंटेलिजेंस काउंसिल ने सरकार को जो आकलन सौंपा है, उसमें कहा गया है कि मौजूदा सैन्य कार्रवाई से ईरान में तख्तापलट की संभावना बहुत कम है। रिपोर्ट के अनुसार शीर्ष नेताओं के मारे जाने के बाद भी ईरान में बड़े पैमाने पर जनविद्रोह देखने को नहीं मिला है।

अमेरिकी जनता भी जंग के खिलाफ

हाल ही में क्विनिपियाक यूनिवर्सिटी के एक सर्वे में भी दिलचस्प आंकड़े सामने आए हैं। सर्वे के अनुसार करीब 53 प्रतिशत अमेरिकी नागरिक ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं। वहीं 44 प्रतिशत लोगों का मानना है कि अमेरिका इजराइल का जरूरत से ज्यादा समर्थन कर रहा है।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी एक बयान में कहा था कि ईरान के खिलाफ कार्रवाई में इजराइल की भूमिका अहम रही है।

युद्ध का बढ़ता खर्च

ईरान के साथ जारी संघर्ष अमेरिका के लिए आर्थिक रूप से भी भारी साबित हो रहा है। वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक युद्ध के शुरुआती दो दिनों में ही अमेरिका ने करीब 5.6 बिलियन डॉलर के हथियार और गोला-बारूद का इस्तेमाल किया।

वहीं अनादोलु एजेंसी के अनुसार सिर्फ दस दिनों में इस युद्ध पर अमेरिका का खर्च 10 बिलियन डॉलर से ज्यादा हो चुका है।

ईरान का पलटवार

इस बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी अमेरिका पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि अमेरिका को यह उम्मीद थी कि युद्ध शुरू होते ही ईरान में सत्ता परिवर्तन हो जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

अराघची के मुताबिक अब अमेरिका अपनी रणनीति बदलकर जंग में बढ़त हासिल करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन इसमें भी उसे सफलता मिलना आसान नहीं होगा।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *