यश की ‘टॉक्सिक’ की डायरेक्टर गीतू मोहनदास कौन हैं? कार सीन ने मचाया तहलका, रामगोपाल वर्मा भी हुए मुरीद

KNEWS DESK – यश की अपकमिंग फिल्म ‘टॉक्सिक’ का टीजर रिलीज होते ही सोशल मीडिया पर जबरदस्त ट्रेंड कर रहा है। एक्टर के 40वें जन्मदिन के मौके पर मेकर्स ने फिल्म का पहला टीजर जारी किया, जिसमें यश का दमदार फर्स्ट लुक देखने को मिला। लेकिन इस टीजर के साथ ही एक नाम और तेजी से चर्चा में आ गया—फिल्म की डायरेक्टर गीतू मोहनदास। खासतौर पर टीजर में दिखाए गए कार वाले सीन ने दर्शकों और फिल्म इंडस्ट्री का ध्यान खींच लिया है।

कार सीन ने बटोरी तारीफें

‘टॉक्सिक’ के टीजर में दिखाया गया स्टाइलिश और इंटेंस कार सीन सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। इस सीन की सिनेमैटिक ट्रीटमेंट और प्रेजेंटेशन के लिए गीतू मोहनदास की जमकर तारीफ हो रही है। कई फिल्ममेकर्स और सेलेब्स ने इस सीन को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी है, जिनमें मशहूर निर्देशक रामगोपाल वर्मा भी शामिल हैं।

बहुत कम लोग जानते हैं कि ‘टॉक्सिक’ की डायरेक्टर गीतू मोहनदास पहले एक जानी-मानी बाल कलाकार रह चुकी हैं। उनका असली नाम गायत्री मोहनदास है। उन्होंने महज 5 साल की उम्र में अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की थी और दिग्गज अभिनेता मोहनलाल के साथ स्क्रीन शेयर की थी। बाद में फिल्म ‘ओन्नू मुथल पूज्यम वारे’ के दौरान उन्होंने अपना स्क्रीन नेम बदलकर गीतू रख लिया।

एक्ट्रेस के तौर पर भी जीता दर्शकों का दिल

बड़ी होने के बाद गीतू ने कई चर्चित फिल्मों में अभिनय किया। ‘लाइफ इज ब्यूटीफुल’, ‘थेंकासी पट्टनम’, ‘वल्कनडी’ और ‘अकाले’ जैसी फिल्मों में उनके काम को सराहा गया। खास तौर पर फिल्म ‘अकाले’ के लिए उन्हें बेस्ट एक्ट्रेस का फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला, जिसने उनके अभिनय करियर को नई पहचान दी।

डायरेक्शन की दुनिया में दमदार एंट्री

साल 2009 में गीतू मोहनदास ने शॉर्ट फिल्म ‘केल्कुन्नुंडो’ से निर्देशन की दुनिया में कदम रखा। इसके बाद 2013 में आई उनकी पहली फीचर फिल्म ‘लायर्स डाइस’, जिसमें नवाजुद्दीन सिद्दीकी अहम भूमिका में नजर आए थे। इस फिल्म को इंटरनेशनल लेवल पर भी काफी सराहना मिली।

‘लायर्स डाइस’ के बाद अब गीतू अपनी मेगा फिल्म ‘टॉक्सिक’ को लेकर सुर्खियों में हैं। टीजर देखने के बाद रामगोपाल वर्मा ने उनकी जमकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि यश स्टारर ‘टॉक्सिक’ का टीजर देखने के बाद उन्हें कोई शक नहीं रहा कि गीतू मोहनदास महिला सशक्तिकरण की जीती-जागती मिसाल हैं और उनके सामने बड़े-बड़े पुरुष निर्देशक भी टिक नहीं पाते।

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