KNEWS DESK – बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव पिछले कुछ समय से लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं। फरवरी महीने की शुरुआत में चेक बाउंस मामले में उन्हें तिहाड़ जेल जाकर सरेंडर करना पड़ा था। हालांकि बाद में उन्हें 18 मार्च तक अंतरिम जमानत मिल गई। जेल से बाहर आने के बाद राजपाल यादव एक पारिवारिक शादी में शामिल हुए, जहां से उनके कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए। इसके बाद उन्होंने मुंबई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की, जिसमें उन्होंने धोखाधड़ी से जुड़े मामले पर खुलकर बात की और मुश्किल समय में साथ देने के लिए फिल्म इंडस्ट्री के लोगों का आभार जताया।
प्रियदर्शन के बयान पर जताई नाराजगी
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राजपाल यादव ने फिल्म निर्देशक प्रियदर्शन के एक बयान पर नाराजगी भी जाहिर की। दरअसल, जब राजपाल जेल में थे, तब प्रियदर्शन ने एक इंटरव्यू में उनके बारे में बात करते हुए कहा था कि वह उन्हें करीब 20 साल से जानते हैं और पहली बार फिल्म जंगल में देखा था। उन्होंने बताया कि उनकी पहली फिल्म मालामाल वीकली राजपाल यादव के साथ थी और तब से वह उन्हें अपनी फिल्मों में कास्ट करते रहे हैं।
प्रियदर्शन ने यह भी कहा था कि उन्होंने अपनी अगली फिल्म के प्रोड्यूसर्स से कहा है कि राजपाल की मौजूदा स्थिति को देखते हुए उन्हें तय फीस से ज्यादा पैसे दिए जाएं। हालांकि इसी बातचीत के दौरान उन्होंने यह भी कह दिया कि राजपाल “कम पढ़े-लिखे” हैं और शायद इसी वजह से उनसे ऐसी गलती हो गई। यही बात राजपाल यादव को नागवार गुजरी और उन्होंने तीखा जवाब देते हुए कहा कि प्रियदर्शन उन्हें ठीक से जानते ही नहीं हैं और वह पढ़े-लिखे इंसान हैं।
प्रियदर्शन ने दी सफाई
अब इस विवाद पर प्रियदर्शन ने अपनी सफाई दी है। एक न्यूज वेबसाइट से बातचीत में उन्होंने कहा कि उनके बयान का गलत मतलब निकाला गया। उनके मुताबिक, वह राजपाल यादव की मासूमियत और इंडस्ट्री में काम करने के दौरान आने वाली चुनौतियों के बारे में बात कर रहे थे।
प्रियदर्शन ने कहा कि उनका आशय यह नहीं था कि राजपाल यादव को नीचा दिखाया जाए। उन्होंने कहा कि शिक्षा सिर्फ किताबों से ही नहीं मिलती, बल्कि जिंदगी के अनुभवों और सड़क से भी बहुत कुछ सीखने को मिलता है। उनका कहना था कि वह सिर्फ यह बताना चाहते थे कि राजपाल की सादगी और भरोसे वाला स्वभाव कभी-कभी उन्हें मुश्किल परिस्थितियों में डाल देता है।
‘राजपाल जैसा मासूम इंसान नहीं देखा’
प्रियदर्शन ने आगे कहा कि उन्होंने अपनी जिंदगी में राजपाल यादव जैसा मासूम इंसान बहुत कम देखा है। उनके मुताबिक, गांव से आने वाले कई लोग बेहद सीधे और भरोसेमंद होते हैं, इसलिए कभी-कभी सही और गलत लोगों में फर्क करना मुश्किल हो जाता है।