KNEWS DESK: टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (TET) को अनिवार्य किए जाने के फैसले के खिलाफ उत्तर प्रदेश के शिक्षकों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। इसी विरोध के तहत शाहजहांपुर जिले के करीब 1500 शिक्षक दिल्ली के रामलीला मैदान में बड़े प्रदर्शन के लिए रवाना हो रहे हैं।

प्राथमिक शिक्षा संघ के जिला अध्यक्ष यशपाल सिंह यादव के अनुसार, इस आंदोलन की पूरी रणनीति तैयार कर ली गई है। जिले के सभी 15 ब्लॉकों से शिक्षक अलग-अलग समूहों में दिल्ली पहुंचेंगे। हर ब्लॉक से करीब 100 शिक्षकों की टीम इस प्रदर्शन में हिस्सा लेगी। शाम 8 बजे के आसपास सभी टीमें रवाना होंगी और देशभर से आए शिक्षकों के साथ मिलकर अपनी आवाज बुलंद करेंगी।
क्या है शिक्षकों की मुख्य मांग?
शिक्षकों का कहना है कि
- 2010 से पहले नियुक्ति के समय उन्होंने सभी निर्धारित शैक्षिक योग्यताएं पूरी की थीं।
- अब 55 से 60 वर्ष की उम्र में, जब वे रिटायरमेंट के करीब हैं, उनसे TET पास करने की उम्मीद करना अव्यवहारिक है।
- केवल शाहजहांपुर में ही लगभग 1900 शिक्षक इस नियम से प्रभावित हो रहे हैं।
पूरा विवाद क्या है?
दरअसल, साल 2011 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद TET को प्राथमिक और जूनियर स्कूलों में शिक्षकों के लिए अनिवार्य कर दिया गया था। इसके बाद होने वाली सभी भर्तियों में TET पास करना जरूरी था। लेकिन नए आदेश में यह अनिवार्यता उन शिक्षकों पर भी लागू कर दी गई है, जिनकी नियुक्ति 2011 से पहले हो चुकी थी। यही फैसला अब विवाद की जड़ बन गया है।
नए आदेश में क्या कहा गया है?
- सभी प्राइमरी और जूनियर शिक्षकों के लिए TET पास करना अनिवार्य होगा।
- 2011 के बाद नियुक्त शिक्षक पहले ही यह परीक्षा पास कर चुके हैं।
- 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों को भी अब यह परीक्षा देनी होगी।
- 57 वर्ष से अधिक आयु के शिक्षकों को TET केवल प्रमोशन के लिए जरूरी होगा।
परीक्षा पास नहीं करने पर क्या होगा?
नए नियम के अनुसार:
- 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों को 2 साल के भीतर TET पास करना होगा।
- अगर वे ऐसा नहीं कर पाते हैं, तो उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति (Compulsory Retirement) दी जा सकती है।
यही प्रावधान शिक्षकों के विरोध का सबसे बड़ा कारण है। उनका कहना है कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों पर इस तरह का दबाव डालना अन्यायपूर्ण है। रामलीला मैदान में होने वाला यह प्रदर्शन इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा रूप दे सकता है। अब देखना होगा कि सरकार और संबंधित संस्थाएं शिक्षकों की मांगों पर क्या रुख अपनाती हैं।