KNEWS DESK- उत्तर प्रदेश में ‘पंडित’ को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। हाल ही में यूपी पुलिस SI भर्ती परीक्षा में ‘पंडित’ वाले सवाल पर बवाल मचा था, और अब नया विवाद बेसिक शिक्षा विभाग की 7वीं कक्षा संस्कृत परीक्षा को लेकर सामने आया है।
बीते दिनों उत्तर प्रदेश के परिषदीय स्कूलों में 7वीं कक्षा की संस्कृत परीक्षा आयोजित की गई। परीक्षा में एक पहेली पूछी गई “बिना पैर के दूर तक जाता है और साक्षर है परंतु पंडित नहीं है”।
इस सवाल में ‘पंडित’ के जिक्र को जातिसूचक और अपमानजनक माना जा रहा है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि संस्कृत की पाठ्यपुस्तक में ऐसी कोई पहेली नहीं है और पेपर तैयार करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
उत्तर प्रदेश पुलिस SI भर्ती परीक्षा का ‘पंडित’ विवाद अभी भी शांत नहीं हुआ है। 14 और 15 मार्च को आयोजित लिखित परीक्षा में एक सवाल में चार विकल्प दिए गए थे, जिसमें ‘पंडित’ भी शामिल था। इस सवाल के बाद बड़े पैमाने पर विरोध शुरू हुआ और कई विधायकों ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर सख्त कार्रवाई की मांग की। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मामले को लेकर कड़े निर्देश जारी किए।
परिषदीय स्कूल उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद (1972) द्वारा संचालित सरकारी प्राथमिक (कक्षा 1-5) और उच्च प्राथमिक (कक्षा 6-8) विद्यालय हैं। ये स्कूल राज्य सरकार द्वारा वित्तपोषित और नियंत्रित होते हैं। यहाँ मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा, मिड-डे मील, स्मार्ट कक्षाएं और आधुनिक बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराया जाता है।
उत्तर प्रदेश में लगातार ‘पंडित’ को लेकर विवाद सामने आने से सामाजिक और राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है। अब सवाल यह है कि बेसिक शिक्षा विभाग और पुलिस भर्ती से जुड़े मामलों में दोषियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी और यह विवाद कितनी जल्दी शांत होगा।