जेईई मेन्स में जुड़वा भाइयों का कमाल, तीन साल की मेहनत लाई रंग, समान अंक हासिल कर पाई सफलता

डिजिटल डेस्क- संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई) मेन सेशन-1 का रिजल्ट जारी होते ही देशभर में टॉपर्स की प्रेरणादायक कहानियां सामने आ रही हैं। इस बार 12 छात्रों ने 100 परसेंटाइल हासिल कर इतिहास रचा है। ओडिशा के भावेश पात्रा ने 100 परसेंटाइल के साथ जेईई मेन 2026 में टॉप किया, लेकिन भुवनेश्वर के दो जुड़वा भाइयों महरूफ और मसरूर अहमद खान की सफलता ने भी सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। भुवनेश्वर निवासी इन जुड़वा भाइयों ने जेईई मेन में बिल्कुल समान अंक हासिल कर एक मिसाल पेश की है। राष्ट्रीय स्तर की इतनी बड़ी परीक्षा में जुड़वा भाइयों का एक जैसा स्कोर बेहद दुर्लभ माना जाता है। दोनों भाइयों का कहना है कि यह पहली बार नहीं है जब उनके अंक समान आए हों। इससे पहले भी कई परीक्षाओं में उनके नंबर लगभग एक जैसे रहे हैं। हालांकि कक्षा 10वीं में दोनों के बीच मामूली अंतर रहा था। मसरूर को 97 प्रतिशत अंक मिले थे, जबकि महरूफ ने 96 प्रतिशत हासिल किए थे। इसके बावजूद दोनों की शैक्षणिक यात्रा लगभग समान रही है।

कोटा में तीन साल की कड़ी तैयारी

इंजीनियर बनने का सपना लेकर महरूफ और मसरूर तीन साल पहले कोटा चले गए थे। कक्षा 10 के बाद से ही उन्होंने नियमित और अनुशासित दिनचर्या के साथ जेईई मेन की तैयारी शुरू कर दी थी। दोनों एक ही अध्ययन मेज पर बैठकर पढ़ाई करते थे, एक ही कोचिंग सामग्री का उपयोग करते थे और एक ही कक्षा में साथ बैठते थे। मसरूर अहमद खान ने एक साक्षात्कार में बताया कि वे पिछले तीन वर्षों से एक ही शिक्षक के मार्गदर्शन में पढ़ाई कर रहे हैं। उनका कहना है कि निरंतर मेहनत और आत्मविश्वास ने उन्हें अच्छे अंक दिलाने में अहम भूमिका निभाई। वहीं महरूफ ने बताया कि दोनों भाई हमेशा साथ पढ़ते, साथ ही अपनी शंकाओं का समाधान करते और जब कभी परिणाम उम्मीद के अनुसार नहीं आते थे तो एक-दूसरे को प्रेरित करते थे। उनका मानना है कि आपसी प्रेरणा और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा ने उनकी तैयारी को और मजबूत बनाया।

आगे का लक्ष्य: आईआईटी और आईएएस

जेईई मेन में शानदार प्रदर्शन के बाद दोनों भाई अब जेईई एडवांस्ड की तैयारी में जुट गए हैं। महरूफ का सपना भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) बॉम्बे से कंप्यूटर विज्ञान में पढ़ाई करने का है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में वे भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी बनकर देश सेवा करना चाहते हैं। दोनों भाइयों का मानना है कि सफलता के लिए लक्ष्य स्पष्ट होना बेहद जरूरी है। वे कहते हैं कि अनुशासन, निरंतर अभ्यास और सकारात्मक सोच से किसी भी कठिन परीक्षा को पार किया जा सकता है।

मां का त्याग बना सफलता की ताकत

महरूफ और मसरूर की सफलता के पीछे उनके परिवार का बड़ा योगदान है। उनकी मां पेशे से स्त्रीरोग विशेषज्ञ हैं, लेकिन बेटों की पढ़ाई के लिए उन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी और कोटा में उनके साथ रहने लगीं। महरूफ बताते हैं कि मां का साथ और मार्गदर्शन उनके लिए सबसे बड़ी ताकत रहा। वहीं उनके पिता भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान भुवनेश्वर में मेडिकल यूनिट के प्रभारी और चिकित्सक हैं। परिवार ने मिलकर बच्चों के सपनों को साकार करने के लिए हर संभव सहयोग दिया।

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