KNEWS DESK- भारतीय क्रिकेट के इतिहास में कपिल देव का नाम हमेशा गौरव के साथ लिया जाएगा। 6 जनवरी 1959 को चंडीगढ़ में जन्मे कपिल देव आज अपना 67वां जन्मदिन मना रहे हैं। उन्हें सिर्फ रिकॉर्ड्स और आंकड़ों के लिए ही नहीं, बल्कि उनकी निडरता, बेबाकी और साहस के लिए भी याद किया जाता है।
कपिल देव की निडरता सिर्फ क्रिकेट तक सीमित नहीं थी। 1987 के शारजाह टूर्नामेंट के दौरान ऐसा वाक्या हुआ, जिसने उनकी साहसिक छवि को और मजबूत किया। भारतीय टीम प्रैक्टिस कर रही थी, तभी मशहूर कॉमेडियन महमूद एक शख्स के साथ आए, जिसे खिलाड़ी तुरंत पहचान नहीं पाए। वह कोई और नहीं, बल्कि अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम थे।
महमूद ने दाऊद का परिचय दिया और ऑफर रखा कि अगर भारत पाकिस्तान को हरा देता है, तो सभी खिलाड़ियों को कार गिफ्ट करेंगे। ड्रेसिंग रूम में सन्नाटा छा गया। तभी कपिल देव आए और उन्होंने साहसिक अंदाज में कहा, “ये कौन है? चल बाहर चल।” उनकी निडर प्रतिक्रिया के बाद दाऊद बिना किसी बहस के ड्रेसिंग रूम से बाहर चला गया। यह किस्सा कई वर्षों तक दबा रहा, जिसे 2013 में दिलीप वेंगसरकर ने सार्वजनिक किया।
कपिल देव का अंतरराष्ट्रीय करियर 1978 से 1994 तक फैला। उन्होंने 131 टेस्ट में 5248 रन और 434 विकेट लिए। वनडे में उनका प्रदर्शन भी शानदार रहा—3783 रन और 253 विकेट।
उनकी सबसे यादगार पारियों में से एक 1983 विश्व कप के जिम्बाब्वे मुकाबले में 175 रन की पारी है, जिसे आज भी क्रिकेट प्रेमियों द्वारा सबसे महान पारी माना जाता है। उनके नेतृत्व में भारत ने पहली बार 1983 में वनडे विश्व कप जीता। तब कपिल देव सिर्फ 24 साल 170 दिन के थे, और वे आज तक विश्व कप जीतने वाले सबसे युवा कप्तान बने हुए हैं।
1984-85 इंग्लैंड सीरीज में दिल्ली टेस्ट में खराब प्रदर्शन के बाद उन्हें टीम से बाहर कर दिया गया। इससे ईडन गार्डन्स में दर्शक भड़क उठे और नारों के साथ समर्थन जताया—“वी वांट कपिल, गावस्कर गो बैक।” 30 साल बाद सुनील गावस्कर ने स्पष्ट किया कि यह फैसला चयनकर्ताओं का था, उनका नहीं।
कपिल देव ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा देते समय टेस्ट में सबसे ज्यादा विकेट का रिकॉर्ड रखा। यह रिकॉर्ड 2000 में कर्टनी वॉल्श ने तोड़ा। आज भी कपिल टेस्ट क्रिकेट के शीर्ष-11 विकेट लेने वालों में शामिल हैं। उनकी कहानी पर आधारित फिल्म ‘83’ में रणवीर सिंह ने कपिल देव की भूमिका निभाई।
कपिल देव की निडरता, साहस और क्रिकेट में योगदान उन्हें भारतीय खेल इतिहास में एक अमर पहचान देते हैं। उनके जन्मदिन पर क्रिकेट प्रेमी और फैंस उन्हें उनके योगदान और अदम्य साहस के लिए याद कर रहे हैं।