शिव शंकर सविता- उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जिले से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है, जहां सगाई के बाद शादी की तैयारियों में जुटे एक युवक ने फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। इस घटना की जानकारी जब उसकी मंगेतर को हुई, तो वह सदमे को बर्दाश्त नहीं कर सकी और अगले ही दिन उसने भी फंदा लगाकर अपनी जान दे दी। इस दोहरी आत्महत्या की घटना से पूरे इलाके में शोक और सन्नाटा पसरा हुआ है। जानकारी के मुताबिक, राजापुर थाना क्षेत्र के पांडेय पुरवा निवासी 23 वर्षीय दुर्गेश पांडेय की शादी सरधुआ थाना क्षेत्र के नैनी गुरगौला गांव की 18 वर्षीय रत्ना मिश्रा के साथ तय हुई थी। दोनों की सगाई 7 फरवरी को हुई थी और आगामी 1 मई को शादी होनी थी। परिवार में खुशियों का माहौल था और दोनों अपने नए जीवन की शुरुआत को लेकर उत्साहित थे।
पहले लगाया वॉट्सएप स्टेटस फिर लगाया गले में फंदा
लेकिन इसी बीच बुधवार रात को दुर्गेश ने एक चौंकाने वाला कदम उठाया। घर में अकेले होने के दौरान उसने एक वीडियो बनाया, जिसमें अपनी आत्महत्या के लिए पिता और बहन को जिम्मेदार ठहराया। वीडियो में उसने कहा कि वह इस कदम को मजबूरी में उठा रहा है और अपनी मां के पास जा रहा है। साथ ही उसने यह भी स्पष्ट किया कि उसकी ससुराल पक्ष का इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है और उन्हें परेशान न किया जाए। वीडियो को वॉट्सएप स्टेटस पर डालने के बाद दुर्गेश ने फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। बताया जा रहा है कि उसने शिव मंदिर में लगे चूल्हे के सहारे दुपट्टे से फंदा बनाया। उस समय घर में कोई मौजूद नहीं था, क्योंकि उसके पिता गुजरात के अहमदाबाद में रहते हैं। घटना की जानकारी परिजनों को अगले दिन देर शाम को हुई, लेकिन मंगेतर रत्ना को इसकी सूचना नहीं दी गई।
मंगेतर की मौत के बाद घर से अचानक गायब हुई युवती
हालांकि, शुक्रवार को जैसे ही रत्ना को दुर्गेश की मौत का पता चला, वह गहरे सदमे में चली गई। पूरे दिन वह गुमसुम रही और रात करीब 9 बजे बिना किसी को बताए घर से निकल गई। कुछ देर बाद जब वह वापस नहीं लौटी, तो परिजन उसकी तलाश में निकले। गांव के बाहर स्थित शिव मंदिर के पास पहुंचने पर उन्होंने देखा कि रत्ना दुपट्टे के सहारे फंदे से लटकी हुई है। इस घटना के बाद रत्ना के भाई आनंद मिश्र ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि दुर्गेश के पिता और बहन उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित करते थे, जिससे वह काफी परेशान रहता था। उन्होंने आरोप लगाया कि उसे खाने-पीने तक की उचित व्यवस्था नहीं दी जाती थी और कई बार उसे कमरे में बंद कर दिया जाता था।