ट्रंप के ‘शांति संकेत’ से शेयर बाजार में जोरदार उछाल, सेंसेक्स 1000 अंक चढ़ा, रुपये पर दबाव बरकरार

डिजिटल डेस्क- मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार में निवेशकों को बड़ी राहत मिली। हफ्तों से वैश्विक तनाव और अनिश्चितता के बीच जूझ रहे बाजार में आज जबरदस्त तेजी देखने को मिली। कारोबार शुरू होने से पहले ही संकेत मिल रहे थे कि बाजार हरे निशान में खुल सकता है और ऐसा ही हुआ। प्रो-ओपनिंग सेशन में सेंसेक्स करीब 1500 अंकों तक उछल गया, हालांकि बाजार खुलने तक यह बढ़त थोड़ी कम होकर लगभग 1000 अंकों के आसपास स्थिर हो गई। वहींनिफ्टी 50 ने भी मजबूत शुरुआत करते हुए 22,800 का स्तर पार कर लिया। निवेशकों में खरीदारी का उत्साह साफ नजर आया।

ग्लोबल संकेतों से मिला सहारा

बाजार में इस तेजी के पीछे सबसे बड़ा कारण वैश्विक स्तर पर आई राहत रही। खासतौर पर डोनाल्ड ट्रंप के एक बयान ने निवेशकों की चिंता को काफी हद तक कम कर दिया। उनके ‘शांति संकेत’ के बाद युद्ध की आशंकाएं थोड़ी कमजोर पड़ीं, जिससे वैश्विक बाजारों में सकारात्मक माहौल बना। अमेरिकी बाजारों में भी सोमवार को शानदार तेजी देखने को मिली। S&P 500 और NASDAQ दोनों में बढ़त दर्ज की गई। हालांकि ईरान द्वारा सीधी बातचीत से इनकार के चलते तेजी थोड़ी सीमित जरूर रही, लेकिन निवेशकों का भरोसा बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक संकेतों के सकारात्मक होने से भारतीय बाजार में निवेशकों की वापसी हुई है। बीते कुछ हफ्तों में भू-राजनीतिक तनाव के कारण बाजार पर दबाव था, लेकिन अब माहौल में सुधार के संकेत मिल रहे हैं। बैंकिंग, आईटी और मेटल सेक्टर के शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली।

रुपये पर बना दबाव

जहां एक ओर शेयर बाजार में तेजी आई, वहीं दूसरी ओर भारतीय मुद्रा पर दबाव बना रहा। भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 93.71 के स्तर तक गिर गया। हालांकि बाद में इसमें थोड़ी रिकवरी आई और यह 93.64 के आसपास ट्रेड करता नजर आया। विशेषज्ञों के मुताबिक, वैश्विक अनिश्चितता और डॉलर की मजबूती के कारण रुपये पर दबाव बना हुआ है। इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव भी मुद्रा को प्रभावित कर रहा है।

आगे क्या रहेगा रुख?

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अगर वैश्विक स्तर पर शांति वार्ता आगे बढ़ती है और तनाव कम होता है, तो भारतीय बाजार में तेजी का सिलसिला जारी रह सकता है। हालांकि निवेशकों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है, क्योंकि भू-राजनीतिक घटनाक्रम में किसी भी बदलाव का असर तुरंत बाजार पर पड़ सकता है।

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