किराएदारों के लिए सरकार का बड़ा तोहफा, HRA पर छूट देने से अब बचेंगे ज्यादा पैसे!

KNEWS DESK- अगर आप मेट्रो शहरों में काम करते हैं और अपनी सैलरी का एक बड़ा हिस्सा किराए के रूप में खर्च करते हैं, तो आपके लिए एक बड़ी खुशखबरी है! सरकार अब आपको HRA (हाउस रेंट अलाउंस) पर ज्यादा टैक्स छूट देने की तैयारी कर रही है। अब तक यह छूट सिर्फ चार प्रमुख मेट्रो शहरों तक सीमित थी, लेकिन सरकार ने इस छूट को बढ़ाकर चार और बड़े शहरों को भी इस दायरे में लाने का प्रस्ताव रखा है।

क्या है सरकार का नया प्रस्ताव?

अब तक, अगर आप मुंबई, दिल्ली, कोलकाता या चेन्नई में रहते थे, तो आपको पुरानी टैक्स व्यवस्था (Old Tax Regime) के तहत अपनी सैलरी का 50% तक HRA छूट के रूप में मिलता था। बाकी शहरों में यह सीमा 40% थी। लेकिन अब सरकार ने इस दायरे को बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है।

नई योजना के मुताबिक, बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और अहमदाबाद में रहने वाले कर्मचारियों को भी 50% HRA छूट का लाभ मिल सकेगा। यानी इन शहरों को भी अब ‘मेट्रो’ शहरों के बराबर दर्जा मिलेगा। यदि यह प्रस्ताव लागू हो जाता है, तो कुल 8 शहरों में रहने वाले कर्मचारी 50% HRA छूट का फायदा उठा सकेंगे, जबकि बाकी भारत में यह सीमा 40% ही रहेगी।

बदलाव की आवश्यकता क्यों पड़ी?

इस बदलाव का सबसे बड़ा कारण इन शहरों की बदलती हुई आर्थिक स्थिति है। पिछले एक दशक में बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे जैसे शहरों में महंगाई और किरायों में वृद्धि ने इन्हें ‘नॉन-मेट्रो’ से बाहर कर दिया है। ये शहर अब देश के प्रमुख टेक्नोलॉजी, मैन्युफैक्चरिंग, और सर्विस हब बन चुके हैं, जिससे यहां के रहने वाले कर्मचारियों का खर्च किसी भी महानगर के मुकाबले कम नहीं रहा।

रोजगार के अवसरों के साथ-साथ यहां के रिहायशी इलाकों में किराए में भी भारी वृद्धि हो गई है, और पुरानी सीमा (40%) इन शहरों के लिए नाकाफी साबित हो रही थी। सरकार का यह कदम इन शहरों के शहरी जनसांख्यिकी और आर्थिक वास्तविकता को स्वीकार करने जैसा है।

टैक्स सेविंग पर होगा कितना असर?

यह बदलाव उन कर्मचारियों के लिए सबसे लाभकारी होगा जो पुरानी टैक्स व्यवस्था (Old Tax Regime) को चुनते हैं। नई टैक्स व्यवस्था में HRA जैसी छूट उपलब्ध नहीं होती, इसलिए वहां इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।

लेकिन अगर आप ओल्ड टैक्स रेजीम में हैं, तो 40% से 50% के स्लैब में आने का सीधा मतलब है कि आपकी टैक्सेबल इनकम कम हो जाएगी और इस प्रकार आपके टैक्स का बोझ हल्का हो जाएगा। इसका असर आपकी बचत पर भी पड़ेगा और आपकी जेब में ज्यादा पैसा बचेगा।

यह कदम नौकरीपेशा लोगों के लिए एक बड़ी राहत साबित होगा, खासकर उन कर्मचारियों के लिए जो उच्च किराए वाले शहरों में रहते हैं। सरकार का यह निर्णय न केवल कर्मचारियों के लिए राहत देने वाला है, बल्कि यह इन बड़े शहरों के आर्थिक विकास और बदलते शहरी परिप्रेक्ष्य को भी दर्शाता है। यदि यह प्रस्ताव जल्दी लागू होता है, तो यह लाखों कर्मचारियों के लिए सैलरी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बचाने का मौका होगा।

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