मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक सीनियर अधिकारी ने बताया कि आगामी वित्त वर्ष में सरकार की प्राथमिकता केंद्रीय योजनाओं का समग्र मूल्यांकन करना होगा। इस प्रक्रिया में यह देखा जाएगा कि क्या किसी योजना का उद्देश्य पूरा हो रहा है, और क्या ये योजनाएं राज्यों के स्तर पर लागू होने वाली योजनाओं से ओवरलैप कर रही हैं। साथ ही, यह भी विचार किया जाएगा कि क्या छोटी और कम प्रभावी योजनाओं को मिलाकर या चरणबद्ध तरीके से समाप्त किया जा सकता है।
यह रिव्यू हर पांच साल में नए वित्त आयोग के साइकिल से पहले किया जाता है, और इसका उद्देश्य योजनाओं की उपयोगिता का मूल्यांकन करना और फंड्स के उपयोग को अनुकूलित करना है। अधिकारियों के अनुसार, इस समीक्षा में कई पैरामीटर शामिल होंगे, जैसे योजनाओं के कार्यान्वयन में राज्यों की भूमिका और उनके प्रदर्शन को भी देखा जाएगा।
विभाग ने इस प्रक्रिया के हिस्से के रूप में नोडल मंत्रालयों से सुझाव भी मांगे हैं। यह सुझाव सोशल सेक्टर की योजनाओं के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। अधिकारी ने यह भी बताया कि इस रिव्यू के दौरान जो सुझाव मिलेंगे, उनका उद्देश्य योजनाओं को और अधिक प्रभावी बनाना होगा, ताकि सरकार के संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा सके और जरूरतमंद लोगों तक कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंच सके।
केंद्र सरकार की यह पहल एक महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि यह सुनिश्चित करने में मदद करेगी कि सरकारी योजनाएं और उनकी नीतियां सही दिशा में चल रही हैं और देश के सामाजिक और आर्थिक विकास में योगदान दे रही हैं।
आने वाले वित्त वर्ष में योजनाओं की समीक्षा से यह संभावना है कि अनावश्यक योजनाओं को समाप्त कर अधिक प्रभावी और उपयोगी योजनाओं को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे सरकारी खजाने की बचत होगी और सामाजिक कल्याण के उद्देश्य को बेहतर तरीके से पूरा किया जा सकेगा।
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