KNEWS DESK- दोस्तों के साथ बैठकी, चाय-कॉफी और हंसी-मज़ाक किसे पसंद नहीं। चार दोस्त साथ निकलें तो वक्त पंख लगाकर उड़ जाता है। लेकिन जैसे ही टेबल पर बिल आता है, माहौल थोड़ा बदल जाता है। अक्सर कोई न कोई दोस्त मुस्कराकर कह देता है—“भाई आज नेट नहीं चल रहा”, या फिर, “आज पैसे नहीं हैं, तू दे दे, कल लौटा दूंगा।” यहीं से शुरू होती है असली कहानी।

इतिहास गवाह है कि ऐसे दोस्त पैसे लौटाने में अक्सर देर कर देते हैं। छोटे अमाउंट के लिए बार-बार याद दिलाना अजीब लगता है, शर्म भी आती है और दोस्ती बिगड़ने का डर अलग। कई बार लोग इसी झिझक में अपनी मेहनत की कमाई भूल जाते हैं। लेकिन अब इस असहज स्थिति से बचने के लिए टेक्नोलॉजी आपका काम आसान बना रही है।
बिना बोले पैसा वसूल करेगा UPI का ‘सीक्रेट’ फीचर
Google Pay, PhonePe और Paytm जैसे यूपीआई ऐप्स में मौजूद ‘Split Bill’ या ‘Split Expense’ फीचर असल में आपका डिजिटल मुंशी है। जब आप किसी ग्रुप के लिए पेमेंट करते हैं, तो ट्रांजैक्शन के बाद ऐप खुद ही बिल बांटने का विकल्प देता है।
जिन दोस्तों का खर्च आपने उठाया, उनके नाम चुनिए। ऐप अपने आप रकम कैलकुलेट करेगा। सभी को नोटिफिकेशन चला जाएगा। सबसे बड़ी बात रिमाइंडर आप नहीं, ऐप भेजेगा। न झिझक, न बहस और न ही दोस्ती पर असर।
चाय, डिनर, मूवी टिकट या ट्रिप जैसे छोटे खर्चों में यह फीचर बेहद काम का है। सामने वाले को बार-बार फोन करने की जरूरत नहीं पड़ती और अकसर लोग नोटिफिकेशन देखकर पेमेंट कर ही देते हैं।
बड़ी रकम फंसी है? अब भावुक नहीं, कानूनी बनिए
अगर मामला बड़ी रकम का है और उधार लेने वाला फोन उठाना या पैसा लौटाना टाल रहा है, तो संकोच छोड़ना जरूरी है। कानून ऐसे मामलों में आपके साथ खड़ा है। कानूनी जानकारों के मुताबिक पहला कदम होता है। वकील के जरिए लीगल नोटिस भेजना। इस नोटिस में उधार की तारीख, रकम, सबूत और भुगतान की समय-सीमा लिखी जाती है। ज्यादातर मामलों में यहीं बात बन जाती है।
सिविल सूट का भी है विकल्प
अगर लीगल नोटिस के बाद भी पैसा न मिले, तो आप CPC के ऑर्डर 37 के तहत सिविल सूट दाखिल कर सकते हैं।
यह एक फास्ट प्रोसेस होता है, जिसमें सामने वाले को 10 दिन के भीतर जवाब देना अनिवार्य होता है।
अगर आपको लगता है कि सामने वाले ने जानबूझकर ठगा है, तो मामला क्रिमिनल भी बन सकता है। IPC धारा 420 – धोखाधड़ी IPC धारा 406 – अमानत में खयानत इन धाराओं में दोषी पाए जाने पर सजा का भी प्रावधान है।
साफ बात अपनी मेहनत की कमाई मांगना कोई एहसान नहीं, आपका अधिकार है। अगर दोस्ती में टेक्नोलॉजी से काम बन जाए तो बेहतर, और अगर बात हद से बाहर जाए तो कानून आपके साथ है। संकोच छोड़िए, स्मार्ट बनिए पैसा भी बचेगा और रिश्ते भी।