KNEWS DESK- सस्ते और किफायती सामान के लिए मशहूर ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म Meesho इन दिनों एक बड़े टैक्स विवाद में फंसता नजर आ रहा है। आयकर विभाग ने कंपनी को करीब 1500 करोड़ रुपये का भारी टैक्स नोटिस जारी किया है। आरोप है कि कंपनी ने अपनी वास्तविक आय को कम दिखाया है।
यह मामला उन करोड़ों ग्राहकों के लिए भी अहम है जो रोजाना इस प्लेटफॉर्म पर सस्ती डील्स और ऑफर्स की तलाश करते हैं। किसी भी ई-कॉमर्स कंपनी पर इतना बड़ा वित्तीय दबाव पड़ने से उसकी कारोबारी रणनीतियों और ग्राहकों को मिलने वाले डिस्काउंट पर भी असर पड़ सकता है।
क्या है पूरा मामला?
आयकर विभाग ने यह टैक्स डिमांड नोटिस वित्त वर्ष 2022-23 के लिए जारी किया है। कंपनी ने खुद स्टॉक एक्सचेंज को दी गई फाइलिंग में इसकी पुष्टि की है।
विभाग का कहना है कि कंपनी द्वारा घोषित आय के आंकड़ों में कुछ विसंगतियां पाई गई हैं। इसी आधार पर टैक्स अधिकारियों ने अतिरिक्त समायोजन (Additional Adjustment) किए हैं, जिसमें बकाया टैक्स के साथ भारी ब्याज भी जोड़ा गया है।
हालांकि कंपनी प्रबंधन का कहना है कि वह इस आदेश की विस्तार से समीक्षा कर रहा है और फिलहाल इससे कंपनी के वित्तीय संचालन पर किसी बड़े नकारात्मक प्रभाव की उम्मीद नहीं है।
डिस्काउंट और टैक्स नियमों को लेकर विवाद
ई-कॉमर्स सेक्टर में अक्सर टैक्स विवादों की सबसे बड़ी वजह ग्राहकों को दिए जाने वाले डिस्काउंट और प्रोत्साहन होते हैं।
कंपनियां ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए भारी छूट देती हैं और इन खर्चों को ‘व्यापारिक खर्च’ (Business Expense) के रूप में अपनी बैलेंस शीट में दिखाती हैं। इससे उनका टैक्स योग्य मुनाफा कम हो जाता है।
लेकिन कई मामलों में आयकर विभाग इन खर्चों को पूरी तरह से टैक्स कटौती के योग्य नहीं मानता। इसी वजह से कंपनियों और टैक्स अधिकारियों के बीच विवाद पैदा हो जाता है और बड़े टैक्स नोटिस जारी किए जाते हैं।
पहले भी मिल चुका है टैक्स नोटिस
Meesho के लिए इस तरह का नोटिस कोई पहली बार नहीं है। कंपनी को इससे पहले भी वित्त वर्ष 2022 से जुड़े मामले में टैक्स नोटिस मिल चुका है।
कंपनी के आईपीओ दस्तावेजों के अनुसार 25 जनवरी 2025 को आयकर विभाग ने एक कारण बताओ नोटिस जारी किया था। इसमें टैक्स रिटर्न में प्रस्तावित बदलावों को लेकर कंपनी से जवाब मांगा गया था।
यह मामला विज्ञापन खर्च की कटौती, फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट से हुए मुनाफे और विदेशी भुगतानों पर टीडीएस (TDS) से जुड़ा हुआ था। बाद में विभाग ने करीब 572 करोड़ रुपये की टैक्स डिमांड का आदेश जारी किया था।
इस फैसले को चुनौती देते हुए कंपनी ने Karnataka High Court का रुख किया, जहां अदालत ने टैक्स डिमांड पर अंतरिम रोक लगा दी थी। फिलहाल यह मामला अदालत में विचाराधीन है।
कंपनी की वित्तीय स्थिति पर भी नजर
ताजा 1500 करोड़ रुपये के नोटिस पर कंपनी ने साफ कहा है कि वह आयकर विभाग के निष्कर्षों से सहमत नहीं है और अपने हितों की रक्षा के लिए सभी जरूरी कानूनी कदम उठाएगी।
हालांकि हाल के वित्तीय आंकड़े बताते हैं कि कंपनी को चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। अक्टूबर से दिसंबर की तिमाही में कंपनी का शुद्ध घाटा 13 गुना बढ़कर 491 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
इसके बावजूद कंपनी के कारोबार में कुछ सकारात्मक संकेत भी मिले हैं। इस दौरान उसका ऑपरेटिंग रेवेन्यू 31 प्रतिशत बढ़कर 3,517 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
वहीं शेयर बाजार में भी निवेशकों की नजर कंपनी के प्रदर्शन पर बनी हुई है। हाल ही में Bombay Stock Exchange पर कंपनी के शेयर हल्की बढ़त के साथ 159.10 रुपये पर बंद हुए।