KNEWS DESK – बॉलीवुड की सदाबहार अदाकारा रेखा (Rekha) ने अपने करियर में कई यादगार किरदार निभाए, लेकिन जिस फिल्म ने उन्हें अभिनय की दुनिया में अमर बना दिया, वह थी ‘उमराव जान’। आज इस कल्ट क्लासिक फिल्म की रिलीज को 45 साल पूरे हो चुके हैं। 2 जनवरी 1981 को रिलीज हुई इस फिल्म ने न सिर्फ रेखा के करियर को नई ऊंचाई दी, बल्कि उन्हें उनका पहला नेशनल अवॉर्ड भी दिलाया। हालांकि, बहुत कम लोग जानते हैं कि ‘उमराव जान’ के लिए रेखा मेकर्स की पहली पसंद नहीं थीं।
स्मिता पाटिल थीं पहली चॉइस
फिल्म के निर्देशक और निर्माता मुजफ्फर अली जब ‘उमराव जान’ की योजना बना रहे थे, तब उनके दिमाग में हीरोइन की एक स्पष्ट छवि थी। उन्हें ऐसी अभिनेत्री चाहिए थी, जो शायरा की संवेदनशीलता और तवायफ की गरिमा—दोनों को पर्दे पर उतार सके। किस्सा टीवी के फेसबुक पेज के मुताबिक, इस रोल के लिए शुरुआत में स्मिता पाटिल को चुना जा चुका था। लेकिन एक दिन जब मुजफ्फर अली की नजर रेखा की एक तस्वीर पर पड़ी, तो उन्हें एहसास हुआ कि रेखा में वे दोनों खूबियां मौजूद हैं, जो ‘उमराव जान’ के किरदार के लिए जरूरी थीं। इसके बाद यह रोल रेखा की झोली में आ गया—और इतिहास बन गया।
बिना खास तैयारी के मिला नेशनल अवॉर्ड
रेखा को ‘उमराव जान’ के लिए बेस्ट एक्ट्रेस का नेशनल फिल्म अवॉर्ड मिला, लेकिन खुद रेखा को इस बात पर हैरानी थी। साल 1986 में BBC एशियन यूनिट को दिए इंटरव्यू में रेखा ने खुलासा किया था कि उन्होंने इस फिल्म के लिए कोई खास ट्रेनिंग नहीं ली थी। उन्होंने कहा कि उन्होंने न तो उर्दू को वर्ड-टू-वर्ड सीखा और न ही किसी तरह की औपचारिक तैयारी की। रेखा ने यहां तक माना कि आज भी उन्हें ‘की’ और ‘का’ के इस्तेमाल में परेशानी होती है। उनके मुताबिक, उन्हें नहीं लगता कि उन्होंने ‘उमराव जान’ के लिए कोई असाधारण मेहनत की थी, जिसके लिए उन्हें नेशनल अवॉर्ड मिलना चाहिए था।
शूटिंग के वक्त निजी दर्द से गुजर रहीं थीं रेखा
रेखा ने यह भी स्वीकार किया था कि ‘उमराव जान’ की शूटिंग के दौरान वह अपनी निजी जिंदगी में काफी दर्द और मुश्किलों से गुजर रही थीं। उनका मानना है कि वही दर्द कहीं न कहीं फिल्म में उनके चेहरे और अभिनय में झलकता है।
रेखा के अनुसार, ‘उमराव जान’ में कुछ अलग था—शायद इसलिए यह फिल्म बनी और इतनी यादगार साबित हुई। वह इसे नियति का खेल मानती हैं।
मुजफ्फर अली की डिटेलिंग ने बनाया जादू
रेखा ने निर्देशक मुजफ्फर अली की जमकर तारीफ की। उन्होंने बताया कि मुजफ्फर अली एक बेहतरीन पेंटर हैं और इसी वजह से फिल्म में कलर्स, कॉस्ट्यूम्स, टेक्सचर्स और बैकग्राउंड पर उनकी पकड़ बेहद शानदार थी। रेखा का मानना है कि इसी बारीकी और कलात्मक दृष्टि ने ‘उमराव जान’ को एक साधारण फिल्म से उठाकर क्लासिक मास्टरपीस बना दिया।