KNEWS DESK – बॉलीवुड की दमदार और बेबाक एक्ट्रेस Neena Gupta एक बार फिर अपने बयान को लेकर चर्चा में हैं। हाल ही में उन्होंने एक पॉडकास्ट इंटरव्यू में अपनी निजी जिंदगी, प्यार और शादी को लेकर खुलकर बात की। इस बातचीत में उन्होंने न सिर्फ अपने पहले रिश्ते पर राय रखी, बल्कि यह भी साफ किया कि वह प्यार को किस नजरिए से देखती हैं।
विवियन रिचर्ड्स संग रिश्ता और अधूरी कहानी
नीना गुप्ता ने अपने युवावस्था के दिनों को याद करते हुए वेस्टइंडीज के पूर्व दिग्गज क्रिकेटर Vivian Richards के साथ अपने रिश्ते पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि दोनों के बीच गहरा लगाव था और साथ बिताया समय बेहद खूबसूरत था। हालांकि, शादी नहीं हो पाई क्योंकि दोनों के करियर और देश अलग थे।
नीना ने सवाल उठाया कि अक्सर उनसे ही यह पूछा जाता है कि शादी क्यों नहीं हुई, जबकि यह सवाल विवियन रिचर्ड्स से क्यों नहीं किया जाता। उन्होंने साफ कहा कि परिस्थितियां ऐसी थीं कि या तो उन्हें भारत छोड़ना पड़ता या विवियन को क्रिकेट—और दोनों में से कोई भी विकल्प संभव नहीं था।
“प्यार जैसा कुछ नहीं समझती”
पॉडकास्ट में जब उनसे पूछा गया कि क्या वह प्यार में विश्वास करती हैं, तो उन्होंने बेबाकी से कहा—“सच बताऊं तो प्यार-व्यार कुछ नहीं होता। अगर मैंने किसी से सच्चा प्यार किया है तो वह मेरी बेटी से।”
नीना ने यह भी कहा कि समाज में रिश्तों को लेकर जो धारणाएं बनाई जाती हैं, वे हमेशा सच्चाई नहीं होतीं। उनके मुताबिक, जिंदगी में जरूरत, जिम्मेदारी और साथ की अहमियत ज्यादा होती है।
दूसरी शादी: प्यार या जरूरत?
अपनी दूसरी शादी पर बात करते हुए नीना गुप्ता ने कहा कि वह प्यार को पारंपरिक मायनों में नहीं समझतीं। उन्होंने स्वीकार किया कि जिंदगी में एक साथी की जरूरत होती है खासकर उम्र के एक पड़ाव पर। उन्होंने माना कि कई बार शादी प्यार से ज्यादा जरूरत और स्थिरता के लिए भी की जाती है।
उनका कहना था कि समाज को दिखाने से ज्यादा जरूरी है अपनी जिंदगी को संतुलित और सुरक्षित बनाना।
संघर्ष से सफलता तक का सफर
नीना गुप्ता ने अपनी बेटी को अकेले पाला और इस दौरान कई सामाजिक और व्यक्तिगत चुनौतियों का सामना किया। उन्होंने कहा कि एक सिंगल मदर के तौर पर उन्हें कई तरह की बातें सुननी पड़ीं, लेकिन उन्होंने कभी सच्चाई से मुंह नहीं मोड़ा। आज वह इंडस्ट्री में एक मजबूत पहचान बना चुकी हैं और महिलाओं के अधिकारों पर खुलकर बोलती हैं। उनका मानना है कि औरतों को अपने फैसलों पर शर्मिंदा नहीं होना चाहिए।