शिव शंकर सविता- हाल के दिनों में बारामती में हुए विमान हादसे की खबरों ने एक बार फिर देश को झकझोर दिया है। इस घटना ने उस कड़वी सच्चाई की याद दिला दी कि तकनीक और सुरक्षा के तमाम दावों के बावजूद हवाई यात्राएं कभी-कभी जानलेवा साबित होती हैं। भारत के राजनीतिक इतिहास में ऐसे कई दर्दनाक मौके आए हैं, जब विमान और हेलीकॉप्टर हादसों में देश ने अपने प्रभावशाली और लोकप्रिय नेताओं को खो दिया। ये हादसे न सिर्फ राजनीति के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए अपूरणीय क्षति बनकर दर्ज हो गए।
विजय रूपाणी: एक झटके में बुझ गया सियासी सफर
12 जून 2025 को गुजरात के अहमदाबाद में हुए एक भीषण विमान हादसे ने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया था। एअर इंडिया का यह विमान अहमदाबाद से लंदन के लिए उड़ान भरने के कुछ ही मिनटों बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में विमान में सवार 241 यात्रियों की मौत हो गई, जिनमें गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी भी शामिल थे। 68 वर्षीय विजय रूपाणी ने वर्ष 2016 से 2021 तक गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया था। उन्हें एक सुलझे हुए संगठनकर्ता और पार्टी के भरोसेमंद नेता के तौर पर जाना जाता था। उनका इस तरह अचानक चले जाना गुजरात ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के लिए भी एक बड़ा झटका माना गया।
वाईएस राजशेखर रेड्डी: पहाड़ियों में टूटा हेलीकॉप्टर, थम गई राजनीति की धड़कन
2 सितंबर 2009 की सुबह आंध्र प्रदेश के लिए किसी सदमे से कम नहीं थी। राज्य के तत्कालीन मुख्यमंत्री वाईएस राजशेखर रेड्डी का हेलीकॉप्टर नल्लामाला की दुर्गम पहाड़ियों में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। कई घंटों तक चले सर्च ऑपरेशन के बाद जब हेलीकॉप्टर का मलबा मिला, तब जाकर हादसे की पुष्टि हुई। वाईएसआर, जैसा कि उन्हें आम लोग बुलाते थे, अपने जनकल्याणकारी फैसलों और सीधे जनता से जुड़ाव के लिए जाने जाते थे। उनकी मृत्यु ने आंध्र प्रदेश की राजनीति की दिशा ही बदल दी। यह हादसा आज भी देश के सबसे चर्चित हेलीकॉप्टर क्रैश मामलों में गिना जाता है।
माधवराव सिंधिया: ग्वालियर राजघराने का राजनीतिक स्तंभ
30 सितंबर 2001 को उत्तर प्रदेश के मैनपुरी जिले के भोगांव में एक चार्टर्ड विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस हादसे में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और ग्वालियर राजघराने के सदस्य माधवराव सिंधिया की मौत हो गई। वह उस समय कानपुर में एक राजनीतिक रैली को संबोधित करने जा रहे थे। माधवराव सिंधिया अपनी शालीन राजनीति और संतुलित विचारों के लिए जाने जाते थे। उनके निधन को कांग्रेस के लिए एक बड़ी क्षति माना गया। इस दुर्घटना में विमान में सवार सभी लोगों की जान चली गई थी, जिसने पूरे देश को शोक में डुबो दिया।
संजय गांधी: युवा नेता, जिसकी उड़ान बीच में ही थम गई
23 जून 1980 को एक विमान हादसे में कांग्रेस नेता संजय गांधी का निधन हो गया। दिल्ली के सफदरजंग एयरपोर्ट के पास प्रशिक्षण उड़ान के दौरान उनका विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। उस वक्त संजय गांधी भारतीय राजनीति के उभरते हुए चेहरों में गिने जाते थे और उन्हें तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का राजनीतिक उत्तराधिकारी माना जा रहा था। उनकी असमय मृत्यु ने देश की राजनीति को एक अलग मोड़ पर ला खड़ा किया। यह हादसा आज भी भारतीय राजनीतिक इतिहास की सबसे चर्चित घटनाओं में शामिल है।