KNEWS DESK- अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा में युद्ध के बाद की स्थिति को संभालने और पुनर्निर्माण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए एक नए अंतरराष्ट्रीय संगठन “बोर्ड ऑफ पीस” का गठन किया है। इस पहल के तहत अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी इस संगठन में शामिल होने का निमंत्रण दिया गया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब हमास और इजराइल के बीच लंबे युद्ध के बाद ट्रंप की 20 प्वाइंट पीस डील के तहत सीजफायर लागू हुआ है और गाजा को दोबारा खड़ा करने की कोशिशें शुरू हो रही हैं।
हमास और इजराइल के बीच युद्ध की शुरुआत साल 2023 में हुई थी, जिसने गाजा को पूरी तरह तबाह कर दिया। महीनों तक चले मिसाइल हमलों, बमबारी और जमीनी संघर्ष में हजारों लोगों की जान गई, जबकि लाखों लोग बेघर हो गए। हालात इतने खराब हो गए कि गाजा में भुखमरी, कुपोषण और बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी देखने को मिली, खासकर बच्चों पर इसका गंभीर असर पड़ा। इसी पृष्ठभूमि में ट्रंप ने 20 प्वाइंट पीस डील पेश की, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच युद्धविराम संभव हो सका।
सीजफायर के बाद गाजा में शासन व्यवस्था, पुनर्निर्माण और शांति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बोर्ड ऑफ पीस का गठन किया गया है। ट्रंप ने इसे सपनों को हकीकत में बदलने की दिशा में अहम कदम बताया है। उनके अनुसार, यह बोर्ड एक नए अंतरराष्ट्रीय संगठन और अस्थायी सरकार की तरह काम करेगा, जिसका मुख्य उद्देश्य गाजा को हथियारों से मुक्त करना, मानवीय सहायता पहुंचाना, तबाह बुनियादी ढांचे का पुनर्निर्माण करना और आर्थिक निवेश के जरिए स्थायी शांति स्थापित करना होगा।
व्हाइट हाउस के मुताबिक, बोर्ड ऑफ पीस गाजा में युद्ध के बाद होने वाले बदलावों की निगरानी करने वाला सर्वोच्च रणनीतिक निकाय होगा और इसकी अध्यक्षता खुद डोनाल्ड ट्रंप करेंगे। बोर्ड का फोकस शासन सुधार, क्षेत्रीय संबंधों को बेहतर बनाना, पुनर्निर्माण के लिए निवेश जुटाना और बड़े पैमाने पर फंडिंग सुनिश्चित करना होगा।
इस बोर्ड में कई प्रभावशाली और विवादित चेहरों को स्थायी सदस्य के रूप में शामिल किया गया है। इनमें अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो, विशेष दूत स्टीव विटकॉफ, ट्रंप के दामाद जैरेड कुश्नर, अरबपति कारोबारी मार्क रोवन, विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा, ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर और उप-राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार रॉबर्ट गैब्रियल जूनियर शामिल हैं। इन सदस्यों की पृष्ठभूमि को देखते हुए बोर्ड की भूमिका और निष्पक्षता को लेकर पहले से ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस शुरू हो गई है।
मुख्य बोर्ड के साथ-साथ गाजा प्रशासन के लिए नेशनल कमेटी फॉर एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ गाजा (NCAG) के गठन की भी घोषणा की गई है। इस समिति की अगुवाई फिलिस्तीनी टेक्नोक्रेट डॉ. अली शाथ करेंगे। यह समिति सार्वजनिक सेवाओं की बहाली, सरकारी संस्थानों के पुनर्निर्माण और आम लोगों की जिंदगी को सामान्य बनाने पर काम करेगी। 12 सदस्यीय इस टीम में आर्थिक, स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा, वित्त और नगर सेवाओं से जुड़े विशेषज्ञ शामिल हैं, जबकि आंतरिक सुरक्षा और पुलिस व्यवस्था की जिम्मेदारी मेजर जनरल सामी नसमान को सौंपी गई है।
इसके अलावा एक अलग गाजा एग्जीक्यूटिव बोर्ड भी बनाया जाएगा, जो जमीन पर शासन व्यवस्था लागू करने में मदद करेगा। इसमें तुर्की, कतर, मिस्र, इजराइल और यूएई के प्रतिनिधियों के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र की मानवीय प्रतिनिधि सिग्रिड काग भी शामिल होंगी, ताकि अंतरराष्ट्रीय समन्वय बना रहे।
भारत के अलावा अर्जेंटीना, कनाडा, मिस्र, तुर्की, अल्बानिया, साइप्रस और पाकिस्तान जैसे देशों को भी इस पहल में शामिल होने का निमंत्रण भेजा गया है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने पुष्टि की है कि प्रधानमंत्री को यह न्योता मिला है और पाकिस्तान गाजा में शांति और सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय प्रयासों का समर्थन करता रहेगा।
इस बीच बोर्ड ऑफ पीस को लेकर एक अहम और विवादित शर्त भी सामने आई है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन चाहता है कि बोर्ड में परमानेंट सदस्य बने रहने के लिए देशों को 1 अरब डॉलर यानी करीब 9 हजार करोड़ रुपये का योगदान देना होगा। बोर्ड के सदस्य देशों का कार्यकाल तीन साल का होगा, लेकिन चार्टर लागू होने के पहले साल में 1 अरब डॉलर नकद देने वाले देशों को स्थायी सदस्यता मिल सकती है। हालांकि अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि बोर्ड में शामिल होने की कोई अनिवार्य फीस नहीं है, लेकिन यह राशि स्थायी सदस्यता का रास्ता खोलती है।