बांग्लादेश में BNP की 17 साल बाद वापसी से भारत को क्या फायदा?

KNEWS DESK- बांग्लादेश के नागरिकों ने अपने मतों से बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) को प्रचंड बहुमत दिया है। पार्टी के नेता तारिक रहमान अब प्रधानमंत्री की कुर्सी संभालने के लिए तैयार हैं। पीएम नरेंद्र मोदी ने तारिक रहमान और उनकी पार्टी को इस शानदार जीत पर बधाई दी है।

नई दिल्ली की नजर इस जीत पर करीबी से है क्योंकि BNP की सत्ता में वापसी सिर्फ बांग्लादेश की राजनीति के लिए ही नहीं, बल्कि भारत के लिए भी महत्वपूर्ण है। खासकर इस समय जब समर्थक अवामी लीग चुनाव नहीं लड़ सकी और शेख हसीना भारत में शरण लेने को मजबूर हुईं। अंतरिम सरकार के नेतृत्व में भारत-विरोधी माहौल बढ़ा और जमात-ए-इस्लामी खुलकर सक्रिय रही, जिसे अक्सर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से जोड़कर देखा जाता है।

भारत इस जीत को न तो संकट के रूप में देख रहा है और न ही जश्न का मौका मान रहा है। BNP की सरकार भारत के लिए टेस्ट केस होगी। सुरक्षा सहयोग, विदेश नीति और आर्थिक साझेदारी तय करेंगे कि दोनों देशों के रिश्ते किस दिशा में जाएंगे। अगर BNP भरोसा दे पाती है और सहयोग के लिए सकारात्मक संकेत देती है, तो भारत उसके साथ संबंध बढ़ाएगा।

पाकिस्तान इस बीच भारत-विरोधी विकल्पों का समर्थन करता रहा है। शेख हसीना के शासनकाल में बांग्लादेश ने पाकिस्तान से दूरी बनाई थी, लेकिन यूनुस के नेतृत्व में भारत से दूरी बढ़ गई और पाकिस्तान के साथ निकटता पर जोर दिया गया। BNP की सत्ता में आने से भारत यह देखेगा कि नई सरकार चीन और पाकिस्तान के साथ किस स्तर तक नजदीकी बढ़ाती है। संतुलन बना रहा तो दिल्ली सहज रहेगी, लेकिन झुकाव बढ़ा तो सतर्कता बढ़ेगी।

भारत ने BNP को समर्थन का संकेत पहले ही दे दिया था। खालिदा जिया की बीमारी और उनके निधन के समय भारत ने अपनी चिंता और समर्थन व्यक्त किया था, और BNP ने इसके लिए आभार जताया। यह वर्षों में दोनों पक्षों के बीच एक दुर्लभ सकारात्मक राजनीतिक पल था।

BNP की जीत से बांग्लादेश में हिंदू समुदाय को भी थोड़ी राहत मिली है। BNP ने हाल की हिंसा और इकबाल मंच के नेता उस्मान हाद की हत्या की आलोचना की है। जबकि जमात-ए-इस्लामी से ऐसी उम्मीद कम ही की जा सकती थी, BNP की सत्ता में आने से हिंदुओं को भी सुरक्षा और मानवाधिकार की स्थिति में सुधार की उम्मीद है।

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