Knews Desk – मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ईरान और इजरायल के बीच टकराव लगातार तेज होता जा रहा है। युद्ध का दौर कई दिनों से जारी है और दोनों देशों के बीच मिसाइल और ड्रोन हमलों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। इसी बीच ईरान की सेना इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने दावा किया है कि उसने ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस-4 के तहत इजरायल पर हमलों की नई लहर शुरू की है।

ईरान ने इजरायल के उत्तरी इलाकों को निशाना बनाते हुए खैबर-शेकन (Kheibar-Shekan) जैसी सॉलिड फ्यूल मिसाइलों का इस्तेमाल किया है। ऐसे में एक बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर सॉलिड फ्यूल मिसाइलें क्या होती हैं और इन्हें इतना खतरनाक क्यों माना जाता है।
क्या होती हैं सॉलिड फ्यूल मिसाइलें?
सॉलिड फ्यूल मिसाइलें ऐसी मिसाइलें होती हैं जिनमें ईंधन पहले से ही ठोस रूप में भरा होता है। यानी इन्हें लॉन्च करने से ठीक पहले अलग से फ्यूल भरने की जरूरत नहीं होती। यही वजह है कि इन मिसाइलों को बहुत कम समय में तैयार करके दागा जा सकता है।
युद्ध की स्थिति में यह तकनीक बेहद कारगर मानी जाती है, क्योंकि दुश्मन को प्रतिक्रिया देने का समय बहुत कम मिलता है। यही कारण है कि कई देशों की आधुनिक मिसाइल प्रणालियों में सॉलिड फ्यूल तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है।
सॉलिड फ्यूल मिसाइलें इतनी खतरनाक क्यों होती हैं?
सॉलिड फ्यूल मिसाइलों को खतरनाक बनाने वाली कई खासियतें होती हैं:
- तुरंत लॉन्च की क्षमता: इन मिसाइलों में पहले से ईंधन भरा होता है, इसलिए इन्हें मिनटों में लॉन्च किया जा सकता है।
- तेज रफ्तार: सॉलिड फ्यूल मिसाइलों की गति बहुत ज्यादा होती है, जिससे इन्हें इंटरसेप्ट करना मुश्किल हो जाता है।
- कम तैयारी की जरूरत: लॉन्च से पहले लंबी तैयारी या फ्यूलिंग की प्रक्रिया नहीं होती।
- स्टोर और ट्रांसपोर्ट करना आसान: ठोस ईंधन होने के कारण इन्हें लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है।
- ज्यादा पेलोड ले जाने की क्षमता: ये मिसाइलें भारी हथियार या वारहेड लेकर लंबी दूरी तक जा सकती हैं।
इन्हीं वजहों से युद्ध में सॉलिड फ्यूल मिसाइलों को बेहद प्रभावी हथियार माना जाता है।
सॉलिड फ्यूल मिसाइल तकनीक का इतिहास
सॉलिड फ्यूल मिसाइल तकनीक का विकास शीत युद्ध के दौर में तेजी से हुआ।
- 1970 के दशक में सोवियत संघ ने इस तकनीक का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल शुरू किया।
- इसके बाद फ्रांस ने मध्यम दूरी की मिसाइल प्रणाली S-3 (SSBS) विकसित की।
- चीन ने 1990 के दशक में सॉलिड फ्यूल मिसाइलों का सफल परीक्षण किया।
- आज उत्तर कोरिया, ईरान और कई अन्य देश भी इस तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं।
ईरान क्यों कर रहा है इसका इस्तेमाल?
विशेषज्ञों के मुताबिक सॉलिड फ्यूल मिसाइलें युद्ध के दौरान तेजी से जवाबी हमला करने के लिए सबसे प्रभावी हथियारों में से एक होती हैं। कम समय में लॉन्च और तेज रफ्तार के कारण दुश्मन की मिसाइल डिफेंस प्रणाली के लिए इन्हें रोकना काफी मुश्किल हो सकता है।
इसी वजह से ईरान इजरायल पर हमलों में सॉलिड फ्यूल मिसाइल तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है, जिससे कम समय में ज्यादा नुकसान पहुंचाया जा सके।