KNEWS DESK – महाराष्ट्र के 29 नगर निगमों में गुरुवार शाम मतदान शांतिपूर्वक संपन्न हो गया, जिसमें सबसे अहम बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव भी शामिल रहा। हालांकि मुंबई में मतदान के दौरान उंगली पर लगाई जाने वाली स्याही को लेकर विवाद गहराता नजर आया। सोशल मीडिया पर वायरल दावों में कहा गया कि स्याही को एसीटोन जैसे केमिकल से आसानी से मिटाया जा सकता है। इस मुद्दे पर विपक्षी दलों ने बीजेपी सरकार और चुनाव आयोग पर गंभीर सवाल उठाए।
इन आरोपों पर चुनाव आयोग ने सफाई देते हुए कहा कि जिस मार्कर पेन से स्याही लगाई जाती है, वही प्रणाली पिछले एक दशक से लागू है। आयोग के अनुसार स्याही को सही तरीके से लगाने के बाद उसे सूखने में 10 से 12 सेकंड लगते हैं और यह सामान्य रूप से मिटाई नहीं जा सकती। अगर कोई मतदाता स्याही हटाकर दोबारा वोट डालने की कोशिश करता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाती है। आयोग ने स्पष्ट किया कि इस्तेमाल किया जा रहा केमिकल 2010-11 से बदला नहीं गया है।
उधर, पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ नगर निगम चुनावों में सियासी समीकरण अलग ही तस्वीर पेश कर रहे हैं। 2023 में एनसीपी के विभाजन के बाद पहली बार शरद पवार और अजित पवार गुट संयुक्त घोषणापत्र के साथ मैदान में उतरे हैं। इसका मकसद वोटों के बंटवारे को रोकते हुए भाजपा को सीधी चुनौती देना बताया जा रहा है। वहीं, पुणे में भाजपा और शिवसेना (शिंदे गुट) के बीच सीट बंटवारे पर सहमति नहीं बन सकी, जिसके चलते शिवसेना ने अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया है। इससे मुकाबला त्रिकोणीय होने की संभावना जताई जा रही है।
राज्य के अन्य नगर निगमों में भी अलग-अलग राजनीतिक रणनीतियां देखने को मिलीं। कई जगह भाजपा और शिवसेना महायुति के तहत साथ चुनाव लड़ रही हैं, जबकि एनसीपी ने कुछ नगर निगमों में अकेले मैदान में उतरने का निर्णय लिया है। लोकसभा और विधानसभा चुनाव 2024 के बाद बदले राजनीतिक समीकरणों का असर इन स्थानीय निकाय चुनावों में साफ नजर आया है।