उत्तराखंड- उत्तराखंड के गैरसैंण चमोली स्थित भराड़ीसैंण में आगामी 9 मार्च से 13 मार्च तक बजट सत्र आहूत किया गया है। 11 मार्च को बजट पेश किया जाएगा। वहीं, बजट सत्र से पहले विधानसभा भवन के चयन को लेकर विवाद गहरा गया है। दरअसल, बीजेपी के विधायक दिलीप रावत ने भवन को गलत स्थान पर बनाने से ऑक्सीजन की कमी, अत्यधिक ठंड और व्यवस्थाओं की दिक्कतों का मुद्दा उठाया है। उधर, सचिवालय संघ से लेकर प्रदेश कांग्रेस पार्टी की भी सत्र को लेकर बहस छिड गई है जिसके चलते जहाँ विपक्ष अभी तक गैरसैंण में होने जा रहे बजट सत्र को लेकर कम समय की अवधि में सत्र करने का विरोध कर रहा था, वहीं भाजपा सरकार के ही विधायक के द्वारा उठाए गए सवालो के चलते एक और मुद्दा सत्ता दल को घेरने का विपक्ष को मौका जरूर मिल गया है।
बता दें कि, उत्तराखंड में गैरसैंण विधानसभा सत्र के दौरान सरकार पर सत्र को चलाने के लिए समय के कम होने के आरोप लगते रहे हैं। माना जाता है कि न तो सरकार और न ही विपक्षी दल के नेता गैरसैंण में ज्यादा दिन रुकने की इच्छा रखते हैं। इसलिए सभी को सत्र के जल्द से जल्द खत्म होने का इंतजार रहता है। इस बार गैरसैंण में बजट सत्र से पहले कुछ इसी तरह की बहस शुरू हो गई है, जिसने गैरसैंण के भराड़ीसैंण में विधानसभा भवन निर्माण को लेकर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। गैरसैंण स्थित भराडीसैंण में विधानसभा सत्र के दौरान व्यवस्थाओं पर हमेशा सवाल खड़े होते हैं और विपक्ष के साथ ही सत्ता पक्ष के भी विधायक कई बार इस बात को कहते हुए नजर आए हैं, लेकिन इस बार बीजेपी विधायक ने तो विधानसभा के अस्तित्व पर ही प्रश्न चिन्ह लगा दिए हैं।
गैरसैंण विधानसभा स्थल के चयन पर अब एक नई बहस छिड़ चुकी है। उत्तराखंड में बजट सत्र से पहले गैरसैंण स्थित विधानसभा के अस्तित्व पर सवाल उठने लगे हैं। हालात ये है कि गैरसैंण विधानसभा स्थल के चयन पर बहस शुरू हो गई है। इसकी शुरुआत बीजेपी विधायक दिलीप रावत ने की है। उनका कहना है कि गैरसैंण में बनाया गया विधानसभा भवन सही जगह पर नहीं बनाया गया है और यहां सत्र के दौरान रहना बेहद मुश्किल है। दरअसल, लैंसडाउन से बीजेपी विधायक महंत दिलीप रावत ने सत्र से पहले आरोप लगाए हैं कि गैरसैंण के भराडीसैंण में विधानसभा भवन बनाने से पहले सही स्थल का चयन नहीं किया गया है। खास बात ये है कि दिलीप रावत इसके पीछे कई तर्क भी देते हैं, जिसके कारण वो भराडीसैंण में विधानसभा के लिए इस जगह को सही नहीं मानते। वहीं विपक्ष भाजपा विधायक के बयान पर तंज कसता भी नजर आ रहा है, और प्रदेश भाजपा सफाई देते. इस बार बहस इस बात को लेकर है कि क्या वाकई विधानसभा भवन का निर्माण बिना सही चयन के हुआ है, या फिर सत्र में शामिल होने वाले राजनेता और कर्मचारी पहाड़ चढ़ना ही नहीं चाहते ?
आपको बता दे, अब तक गैरसैंण में कब- कब आहूत हुआ विधानसभा सत्र
9 से 11 जून 2014 तक गैरसैंण में टेंट में विधानसभा विशेष सत्र आहूत हुआ था.
2 से 3 नवंबर 2015 तक गैरसैंण में टेंट में विधानसभा सत्र आहूत हुआ था.
17 से 18 नवंबर 2016 तक गैरसैंण के भराड़ीसैंण में बने स्थायी विधानसभा भवन में विधानसभा सत्र आहूत हुआ था.
7 से 8 दिसंबर 2017 तक भराड़ीसैंण विधानसभा भवन में सत्र आहूत हुआ था.
20 से 26 मार्च 2018 तक भराड़ीसैंण में बजट सत्र आहूत हुआ था.
साल 2019 में भराड़ीसैंण विधानसभा भवन में कोई भी सत्र आहूत नहीं हुआ.
3 से 7 मार्च 2020 तक भराड़ीसैंण में बजट सत्र आहूत हुआ था.
1 से 6 मार्च 2021 तक भराड़ीसैंण में बजट सत्र आहूत हुआ था.
साल 2022 में भराड़ीसैंण विधानसभा भवन में कोई भी सत्र आहूत नहीं हुआ.
13 से 16 मार्च 2023 तक भराड़ीसैंण में बजट सत्र आहूत हुआ था.
21 से 23 अगस्त 2024 तक भराडीसैंण में विधानसभा सत्र आहूत हुआ था.
19 से 20 अगस्त 2025 तक भराडीसैंण में विधानसभा सत्र आहूत हुआ था.
अब गैरसैंण में विधानसभा भवन को गलत स्थान पर बनाने से ऑक्सीजन की कमी, अत्यधिक ठंड और व्यवस्थाओं की दिक्कतों का मुद्दा उठा ही है लेकिन इसके साथ ही कांग्रेस सहित अन्य दल गैरसैंण में कम समय तक की अवधि में सत्र का आयोजन करने का भी विरोध कर रहे है,आरोप है कम अवधि के चलते जनता के जुड़े मुद्दे नहीं चर्चा में आ पाते जिसके लिए सरकार को कम से कम अवधि 1 माह की रखनी चाहिए वहीं भाजपा विधायक चमोली ने कांग्रेस पर तंज करते कहा की अवधि विषयों के हिसाब से कार्य मतगणना की बैठक में बढ़ाई व घटाई जा सकती है। अगर कांग्रेस चाहे तो वो सत्र के बाद भी वही रह कर काम कर ले हमें कोई आपत्ति नहीं।
कुल मिलकर भाजपा का मानना है कि इस मामले में विधानसभा स्थल चयन की बात कहकर बीजेपी विधायक दिलीप रावत ने कांग्रेस को घेरने की कोशिश तो की है लेकिन कांग्रेस इस बात को सरकार की मंशा से जोड़ते हुए सरकार को गैरसैंण विरोधी बता रही है. गौर हो कि साल 2024 में भी कुछ विधायकों ने सीएम धामी को पत्र लिखकर बजट सत्र गैरसैंण की बजाय देहरादून में कराने की गुजारिश की थी। तब विधायकों की मांग को मानते हुए सरकार ने सत्र देहरादून में ही करवाया था। यहां तक कि 2025 बजट सत्र भी देहरादून में ही हुआ था। यहां गौर करने वाली बात ये है कि कांग्रेस की हरीश रावत सरकार के समय ये संकल्प पारित किया गया था कि बजट सत्र को उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी गैरसैंण में ही कराया जाएगा हालांकि, समय के साथ इस विकल्प में संशोधन होते रहे हैं। हरीश रावत विधायकों को ठंड लगने वाले बयानों पर तंज भी कसते रहे हैं और अब भाजपा के विधायक भी। ऐसे में सवाल यह है की प्रदेश में रही कोई भी सरकार गैरसैंण को स्थाई राजधानी बनाने में अभी भी कतरा रही है। प्रदेश का दुर्भाग्य है राज्य बने 25 साल तो पूरे हो गए है,लेकिन इस राज्य को अभी तक पूर्ण राजधानी नहीं मिली।