शिव शंकर सविता- उत्तर प्रदेश में 166 दिनों तक चले विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के बाद 10 अप्रैल 2026 को अंतिम मतदाता सूची जारी कर दी गई। इस बार की सूची में बड़ा उछाल देखने को मिला है और कुल मतदाताओं की संख्या बढ़कर 13 करोड़ 39 लाख 84 हजार 792 हो गई है। नई सूची के अनुसार, पुरुष मतदाताओं की संख्या 7,30,71,061 है, जबकि महिला मतदाता 6,09,09,525 हैं। इसके अलावा 4,206 तृतीय लिंग मतदाता भी शामिल किए गए हैं। खास बात यह है कि जेंडर रेशियो 824 से बढ़कर 834 हो गया है, जो महिला भागीदारी में सुधार का संकेत देता है। यह अभियान 27 अक्टूबर 2025 से शुरू होकर 10 अप्रैल 2026 तक चला, जिसमें 75 जिलों में बड़े स्तर पर सत्यापन किया गया। इस प्रक्रिया में लाखों अधिकारियों और बूथ लेवल कर्मचारियों ने भाग लिया, जिससे सूची को अधिक पारदर्शी और सटीक बनाया जा सका। मसौदा सूची 6 जनवरी 2026 को जारी हुई थी, जिसमें 12.55 करोड़ मतदाता थे। इसके बाद दावे और आपत्तियों की सुनवाई के बाद अंतिम सूची तैयार की गई। मसौदा सूची की तुलना में कुल 84,28,767 नए मतदाता जुड़े हैं। युवाओं की भागीदारी में भी जबरदस्त वृद्धि हुई है, खासकर 18-19 आयु वर्ग में 14 लाख से अधिक नए वोटर जुड़े।
सबसे ज्यादा बढ़ोतरी वाले जिले
| जिला | बढ़े मतदाता |
|---|---|
| प्रयागराज | 3,29,421 |
| लखनऊ | 2,85,961 |
| बरेली | 2,57,920 |
| गाजियाबाद | 2,43,666 |
| जौनपुर | 2,37,590 |
इन आंकड़ों से साफ है कि शहरी और बड़े जिलों में मतदाताओं की संख्या तेजी से बढ़ी है।
विधानसभा क्षेत्रों में बढ़ोतरी
साहिबाबाद, जौनपुर, लखनऊ पश्चिम, लोनी और फिरोजाबाद जैसे विधानसभा क्षेत्रों में सबसे अधिक नए मतदाता जुड़े हैं, जो इन इलाकों में बढ़ती आबादी और राजनीतिक सक्रियता को दर्शाता है।
पारदर्शिता और सख्त प्रक्रिया
पुनरीक्षण के दौरान करीब 1.04 करोड़ मतदाताओं ने सत्यापन नहीं कराया, जबकि 2.22 करोड़ मामलों में विसंगतियां पाई गईं। इन सभी पर नोटिस जारी कर सुनवाई की गई। राज्यभर में 5,621 केंद्रों पर सुनवाई हुई और हर मामले को नियमों के तहत निपटाया गया। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि बिना नोटिस किसी भी मतदाता का नाम नहीं हटाया गया। सभी विलोपन सक्षम अधिकारियों के आदेश के बाद ही किए गए, जिससे प्रक्रिया की पारदर्शिता बनी रही।
राजनीतिक दलों और जनता की भागीदारी
इस पूरे अभियान में राजनीतिक दलों की सक्रिय भागीदारी रही। सैकड़ों बैठकों के जरिए सुझाव लिए गए और प्रक्रिया को बेहतर बनाया गया। वहीं शिकायत निस्तारण में 99.8% मामलों का समाधान कर यूपी ने शानदार प्रदर्शन किया। “बुक ए कॉल विद BLO” जैसी डिजिटल सुविधा ने भी मतदाताओं को बड़ी राहत दी, जिसमें 97% कॉल्स का सफल निस्तारण हुआ।