डिजिटल डेस्क- सुप्रीम कोर्ट ने NEET UG पास करने वाले EWS श्रेणी के छात्रों को बड़ी राहत देते हुए निजी मेडिकल कॉलेजों में इस कोटे के तहत प्रोविजनल एडमिशन देने का आदेश दिया है। यह ऐतिहासिक फैसला जबलपुर के 19 वर्षीय छात्र अथर्व चतुर्वेदी की याचिका पर आया है, जिसने अपने दम पर सर्वोच्च न्यायालय में पैरवी कर देशभर के छात्रों के लिए रास्ता खोल दिया। अथर्व ने NEET UG परीक्षा पास की थी, लेकिन मध्य प्रदेश में EWS कोटे के तहत निजी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए स्पष्ट नीति न होने के कारण उन्हें एडमिशन नहीं मिल पा रहा था। इस अन्याय के खिलाफ उन्होंने पहले जबलपुर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और बाद में सीधे सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए।
10 मिनट की दलील में सुप्रीम कोर्ट ने दिया निर्देश
बताया जा रहा है कि उन्होंने मुख्य न्यायाधीश के समक्ष मात्र 10 मिनट की प्रभावशाली दलील में अपना पक्ष स्पष्ट कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए NMC और मध्य प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि 2025-26 सत्र के लिए नीट यूजीसी पास कर चुके EWS उम्मीदवारों को निजी कॉलेजों में प्रोविजनल एडमिशन दिया जाए। हालांकि निजी मेडिकल कॉलेजों में EWS कोटे के तहत फीस संरचना क्या होगी, इस पर अभी स्पष्टता आना बाकी है।
कौन हैं अथर्व चतुर्वेदी?
अथर्व जबलपुर के एक साधारण परिवार से आते हैं और डॉक्टर बनने का सपना देखते हैं। उन्होंने 12वीं की पढ़ाई गणित, बायोलॉजी, अंग्रेजी और कंप्यूटर साइंस विषयों से पूरी की। उनके पिता मनोज चतुर्वेदी पेशे से वकील हैं, लेकिन उन्होंने कभी सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस नहीं की। अथर्व ने अपने पिता को काम करते देख कानून की बारीकियां समझीं और खुद ही अपनी लड़ाई लड़ने का फैसला किया। रिपोर्ट्स के अनुसार, अथर्व ने दो बार NEET UG परीक्षा पास की और 530 अंक हासिल किए। उन्होंने JEE Main भी पास किया था और जबलपुर के गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कॉलेज में सीट मिली थी, लेकिन उनका लक्ष्य मेडिकल क्षेत्र में करियर बनाना था। EWS कोटे के तहत नीति न होने के कारण उनका सपना अधूरा रह रहा था। अब सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से न केवल अथर्व, बल्कि देशभर के उन छात्रों को राहत मिली है जो EWS श्रेणी में होने के बावजूद निजी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश से वंचित थे। यह फैसला शिक्षा के अधिकार और समान अवसर की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।