KNEWS DESK – मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने भोजशाला विवाद मामले में बड़ा निर्देश जारी किया है। अदालत ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की विस्तृत सर्वे रिपोर्ट पर दोनों पक्षों को दो सप्ताह के भीतर अपनी आपत्तियां दर्ज कराने को कहा है।
ASI ने 98 दिनों तक चले सर्वेक्षण के बाद 10 खंडों में कुल 2089 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट अदालत में पेश की है। इस रिपोर्ट में परिसर से जुड़े कई पुरातात्विक और धार्मिक साक्ष्यों का उल्लेख किया गया है, जिससे मामला और संवेदनशील हो गया है।
1700 से अधिक कलाकृतियां मिलने का दावा
रिपोर्ट के अनुसार, सर्वे के दौरान परिसर से 1700 से अधिक कलाकृतियां और संरचनात्मक अवशेष सामने आए हैं। इनमें मूर्तियां, स्तंभ, दीवारों के हिस्से, भित्ति चित्र और स्थापत्य सामग्री शामिल हैं।

ASI ने दावा किया है कि परिसर में भगवान शिव, विष्णु, गणेश और वासुकी नाग (सात फनों वाले नाग) से संबंधित मूर्तियों और शिल्प के अवशेष मिले हैं। इन अवशेषों का केमिकल ट्रीटमेंट कर उन्हें वैज्ञानिक साक्ष्य के रूप में दर्ज किया गया है।
शिलालेख और संस्कृत के श्लोक
रिपोर्ट में उल्लेख है कि परिसर के भीतर और आसपास बड़ी संख्या में संस्कृत, देवनागरी और नागरी लिपि के शिलालेख मिले हैं। कई शिलालेख 11वीं–12वीं शताब्दी के बताए गए हैं और उन्हें परमार काल से जोड़ा गया है।

कुछ अभिलेखों में “श्री सरस्वत्यै नमः” जैसे संस्कृत उद्घोष और देवी सरस्वती की स्तुति से जुड़े श्लोक दर्ज होने की बात कही गई है। ASI ने लिपि, भाषा और शिल्प शैली के आधार पर इन्हें मध्यकालीन हिंदू मंदिर परंपरा से संबद्ध माना है।
मंदिर वास्तु से मेल खाने के संकेत
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि परिसर में मिले स्तंभ आधार, दीवारों की दिशा और पत्थर के फर्श के अवशेष पारंपरिक मंदिर वास्तु योजना से मेल खाते हैं। कुछ स्थानों पर यज्ञकुंड जैसी संरचनात्मक आकृतियों का भी जिक्र किया गया है।
स्तंभों और पत्थरों पर पुष्प आकृतियां, बेलबूटे, कीर्तिमुख, कमल आकृतियां और देवी-देवताओं की मूर्तिकारी के चिह्न पाए जाने का दावा किया गया है।
मस्जिद निर्माण में प्राचीन अवशेषों के उपयोग का उल्लेख
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कमाल मौला मस्जिद के निर्माण में भोजशाला के प्राचीन अवशेषों का उपयोग किया गया हो सकता है। परिसर में फारसी और अरबी भाषा के शिलालेख भी मिले हैं, जो बाद के कालखंड में मस्जिद या दरगाह के रूप में उपयोग का संकेत देते हैं।
ASI ने दर्ज किया है कि वर्तमान संरचना में इस्लामी स्थापत्य के तत्व—जैसे मेहराब, मिहराब की दिशा और फारसी अभिलेख—भी मौजूद हैं।