विधानसभा में सरकार ने पेश किए आंकड़े, 2025 में सबसे ज्यादा 13 हजार से अधिक गुमशुदगी के मामले दर्ज; पुलिस चला रही विशेष अभियान
Knews Desk- मध्य प्रदेश में बेटियों की सुरक्षा को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। राज्य विधानसभा में सरकार ने जानकारी दी है कि पिछले पांच सालों में प्रदेश से 61 हजार से ज्यादा बालिकाएं लापता हुई हैं। इनमें से बड़ी संख्या में बच्चियों को पुलिस ने तलाश कर सुरक्षित वापस ला लिया, लेकिन अब भी 3,241 बालिकाओं का कोई सुराग नहीं मिल पाया है।
कांग्रेस विधायक अजय अर्जुन सिंह के सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की ओर से विधानसभा में दिए गए लिखित जवाब में बताया गया कि 31 मई 2026 तक प्रदेश में कुल 61,112 बालिकाओं के लापता होने के मामले दर्ज हुए। वहीं, पुराने लंबित मामलों को मिलाकर पुलिस ने 61,498 बालिकाओं को बरामद किया है।
हर दिन औसतन 33 बच्चियां हुईं लापता
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले पांच वर्षों में मध्य प्रदेश में हर दिन औसतन करीब 33 बालिकाओं के गायब होने की रिपोर्ट दर्ज हुई। साल 2025 में सबसे ज्यादा 13,146 बच्चियों के लापता होने के मामले सामने आए। वहीं, साल 2026 में 1 जनवरी से 31 मई तक सिर्फ पांच महीनों में 6,309 बालिकाओं के गुम होने की शिकायत दर्ज की गई।
3 हजार से ज्यादा बच्चियों की तलाश जारी
सरकार ने विधानसभा में बताया कि अब भी लापता 3,241 बालिकाओं की तलाश के लिए पुलिस लगातार अभियान चला रही है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार, नाबालिगों के गायब होने की शिकायत मिलने पर सीधे अपहरण की धाराओं में FIR दर्ज कर जांच की जाती है।
बालिकाओं की बरामदगी और मानव तस्करी रोकने के लिए पुलिस की ओर से ‘ऑपरेशन मुस्कान’ चलाया जा रहा है। इसके अलावा किशोरियों के लिए ‘सृजन’ और बालकों के लिए ‘अभिमन्यु’ अभियान भी संचालित किए जा रहे हैं।
मानव तस्करी रोकने के लिए बनाई गईं विशेष टीमें
सरकार ने बताया कि प्रदेश में मानव तस्करी रोकने के लिए राज्य स्तर पर एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग ब्यूरो काम कर रहा है। वहीं, सभी 52 जिलों में महिला थानों के तहत मानव तस्करी विरोधी इकाइयां (AHTU) बनाई गई हैं।
लापता बालिकाओं की तलाश और मामलों की निगरानी के लिए जिला और राज्य स्तर पर नियमित समीक्षा बैठकें भी आयोजित की जा रही हैं, ताकि बच्चियों की बरामदगी में तेजी लाई जा सके और मानव तस्करी जैसे अपराधों पर रोक लगाई जा सके।