डिजिटल डेस्क- राजधानी लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में बीते शुक्रवार को हुई तोड़फोड़ और महिला अधिकारियों के साथ अभद्रता की घटना को लेकर हालात लगातार गंभीर होते जा रहे हैं। घटना के 72 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बावजूद अब तक एफआईआर दर्ज न होने से विश्वविद्यालय के शिक्षक, रेजीडेंट डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ और कर्मचारियों में भारी आक्रोश है। सोमवार को KGMU की संयुक्त समिति ने पुलिस प्रशासन को 24 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो OPD सेवाएं बंद कर दी जाएंगी। समिति में फैकल्टी सदस्य, रेजीडेंट डॉक्टर, नर्सिंग यूनियन और कर्मचारी संगठन शामिल हैं।
अर्पणा यादव के समर्थन में आये 100-150 लोगों ने की थी तोड़फोड़
संयुक्त समिति के अनुसार, 9 जनवरी को अपर्णा यादव के समर्थकों के रूप में आए करीब 100 से 150 लोगों ने KGMU परिसर में जमकर हंगामा किया। आरोप है कि इस दौरान कुलपति, प्रति-कुलपति, विशाखा समिति की अध्यक्ष और प्रॉक्टोरियल बोर्ड की महिला सदस्यों के साथ न केवल अभद्र भाषा का प्रयोग किया गया, बल्कि उनके साथ दुर्व्यवहार भी हुआ। इसके अलावा कार्यालयों में तोड़फोड़, सामान फेंकने और कामकाज ठप करने की घटनाएं भी सामने आईं। KGMU प्रशासन ने घटना के दिन ही प्रॉक्टर के माध्यम से चौक थाने में तहरीर दी थी, लेकिन हैरानी की बात यह है कि तीन दिन बीत जाने के बावजूद पुलिस ने कोई एफआईआर दर्ज नहीं की। डॉक्टरों और कर्मचारियों का कहना है कि यह न्याय में देरी का स्पष्ट उदाहरण है और इससे अपराधियों के हौसले बढ़ रहे हैं।
संयुक्त समिति ने लगाया अर्पणा
संयुक्त समिति ने आरोप लगाया कि अपर्णा यादव की कार्यप्रणाली उनके पद और जिम्मेदारी के अनुरूप नहीं है। समिति का कहना है कि बिना ठोस तथ्यों के प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विश्वविद्यालय प्रशासन को बदनाम करने की कोशिश की गई, जिससे न केवल KGMU की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है, बल्कि सरकार की छवि भी प्रभावित हुई है। डॉक्टरों का कहना है कि KGMU देश के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में से एक है, जहां उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि आसपास के राज्यों से भी गंभीर और जटिल बीमारियों के मरीज इलाज के लिए आते हैं। ऐसे संस्थान में अगर शीर्ष अधिकारी ही सुरक्षित नहीं हैं, तो आम डॉक्टर, रेजीडेंट, नर्स और कर्मचारी खुद को कैसे सुरक्षित महसूस करें।