KNEWS DESK – West Bengal में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद वोटर लिस्ट में बड़े स्तर पर बदलाव देखने को मिला है। चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में करीब 91 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं, जो कुल मतदाता संख्या का लगभग 11.9 प्रतिशत है। इस कार्रवाई के बाद मतदाताओं की संख्या करीब 7.6 करोड़ से घटकर लगभग 7.04 करोड़ रह गई है।
क्या है पूरा मामला?
SIR प्रक्रिया के तहत मतदाताओं के नामों का सत्यापन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में ऐसे नाम सामने आए जिन्हें “विवेचनाधीन” श्रेणी में रखा गया था। जांच पूरी होने के बाद इन नामों को सूची से हटाया गया। आंकड़ों के मुताबिक, 60 लाख से ज्यादा ऐसे मामलों में से करीब 27 लाख नाम सीधे डिलीट कर दिए गए।
किन जिलों में सबसे ज्यादा नाम कटे?
राज्य के कई जिलों में डिलीशन रेट काफी ज्यादा देखने को मिला है:
- दक्षिण दिनाजपुर: 58%
- दार्जिलिंग: 55.3%
- उत्तर 24 परगना: 55.1%
- पश्चिम बर्धमान: 53.8%
- कूचबिहार: 50.7%
- पश्चिम मिदनापुर: 50.6%
- हावड़ा: 45.6%
- अलीपुरद्वार: 44.8%
- दक्षिण 24 परगना: 43%
- मुर्शिदाबाद: 41.8%
- बीरभूम: 40.6%
- कोलकाता: 36.3%
वहीं कुछ जिलों में यह आंकड़ा अपेक्षाकृत कम रहा, जैसे पुरुलिया (17.7%) और बांकुड़ा (16.7%)।
2021 चुनाव से क्या कनेक्शन?
दिलचस्प बात यह है कि 2021 के विधानसभा चुनाव के वोट प्रतिशत और अब हटाए गए नामों के आंकड़ों में एक पैटर्न नजर आता है। जिन जिलों में Trinamool Congress (TMC) या Bharatiya Janata Party (BJP) का दबदबा था, वहां भी बड़ी संख्या में नाम हटाए गए हैं।
उदाहरण के तौर पर:
- कूचबिहार में 2021 में बीजेपी को करीब 49% वोट मिले थे, जबकि यहां 50% से ज्यादा नाम हटे
- अलीपुरद्वार में बीजेपी को करीब 49.7% वोट मिले थे और यहां 44.8% नाम कटे
- पूर्व मिदनापुर में TMC और BJP के बीच कड़ी टक्कर थी, वहां भी 33.3% नाम हटाए गए
इतनी बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटने से आने वाले चुनावों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। राजनीतिक दलों के लिए यह एक बड़ा मुद्दा बन सकता है, क्योंकि इससे वोट बैंक की संरचना बदल सकती है।