‘बरी हो चुका हूं, फिर इनामी अपराधी क्यों?’ आशुतोष ब्रह्मचारी की याचिका, यूपी पुलिस पर सवाल

K News Desktop- जगतगुरु जगतगुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष ब्रह्मचारी और स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के बीच चल रहा विवाद अब अदालत तक पहुंच गया है। आशुतोष ब्रह्मचारी की ओर से उन्हें “इनामी अपराधी” बताए जाने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट में रिट याचिका दाखिल की गई है

मामले में आशुतोष ब्रह्मचारी ने कहा है कि अदालत से बरी होने के बाद भी उन्हें “इनामी अपराधी” बताया जा रहा है। इसी को लेकर हाईकोर्ट में संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत रिट याचिका दायर की गई है। याचिका में पुलिस रिकॉर्ड में सुधार करने और संबंधित पोस्ट हटाने का निर्देश देने की मांग की गई है।

यह याचिका श्री कृष्ण सेना के प्रदेश महामंत्री और हाईकोर्ट के अधिवक्ता सीताराम यादव तथा अधिवक्ता विनोद सिंह के माध्यम से दाखिल की गई है।

याचिका में कहा गया है कि थाना कांधला, जनपद शामली में दर्ज एक आपराधिक मुकदमे के आधार पर पुलिस ने जल्दबाजी में आशुतोष ब्रह्मचारी को इनामी घोषित कर दिया था। हालांकि बाद में मामले की न्यायिक सुनवाई के बाद 30 जुलाई 2024 को कैराना (जिला शामली) की एसीजेएम अदालत ने उन्हें इस मुकदमे में सम्मानपूर्वक बरी कर दिया।

इसके बावजूद आरोप है कि संबंधित पुलिस अधिकारियों के आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आज भी उन्हें “इनामी अपराधी” के रूप में दिखाने वाली पोस्ट मौजूद है।

याचिका में कहा गया है कि अदालत से बरी हो जाने के बावजूद किसी व्यक्ति का झूठा आपराधिक इतिहास सार्वजनिक मंच पर दिखाना गलत है। इससे उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा, धार्मिक पहचान और सार्वजनिक छवि को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है।

रिट याचिका में कहा गया है कि ऐसा करना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार का उल्लंघन है। याचिकाकर्ता का कहना है कि किसी भी व्यक्ति की प्रतिष्ठा और सम्मान उसकी मौलिक स्वतंत्रता का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

याचिका में हाईकोर्ट से मांग की गई है कि संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया जाए कि वे तुरंत सोशल मीडिया से उक्त पोस्ट हटाएं और आधिकारिक दस्तावेजों में आवश्यक सुधार करें। साथ ही बिना सत्यापन किसी व्यक्ति का आपराधिक इतिहास सार्वजनिक मंच पर प्रकाशित न करने के निर्देश भी दिए जाएं।

इसके अलावा प्रतिष्ठा को हुए नुकसान के संदर्भ में न्यायालय से उचित आदेश पारित करने की भी प्रार्थना की गई है। इस मामले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में जल्द सुनवाई होने की संभावना जताई जा रही है.

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