‘डिप्टी स्पीकर का पद सात साल से खाली’, मणिकम टैगोर का NDA सरकार पर हमला, संविधान के उल्लंघन का आरोप

डिजिटल डेस्क- कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने लोकसभा में डिप्टी स्पीकर का पद लंबे समय से खाली रहने को लेकर केंद्र की एनडीए सरकार पर तीखा हमला बोला है। उनका कहना है कि यह कोई साधारण प्रक्रियात्मक चूक नहीं, बल्कि संसदीय लोकतंत्र की मूल भावना पर आघात है। टैगोर ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने सात वर्षों से इस संवैधानिक पद को भरा नहीं है, जो संविधान के प्रावधानों के विपरीत है। टैगोर ने संविधान के अनुच्छेद 93 का हवाला देते हुए कहा कि लोकसभा को एक स्पीकर और एक डिप्टी स्पीकर का चुनाव करना अनिवार्य है। “संविधान में ‘shall’ शब्द का इस्तेमाल किया गया है, ‘may’ नहीं। इसका अर्थ है कि यह बाध्यकारी प्रावधान है,” उन्होंने कहा। उनके मुताबिक, डिप्टी स्पीकर का पद खाली रखना संसदीय व्यवस्था की संतुलन प्रणाली को कमजोर करता है।

विपक्ष का सदस्य ही बैठता रहा है डिप्टी स्पीकर के पद पर

उन्होंने यह भी कहा कि परंपरा के अनुसार डिप्टी स्पीकर का पद प्रायः विपक्ष को दिया जाता रहा है, जिससे सदन की कार्यवाही में निष्पक्षता और संतुलन सुनिश्चित होता है। टैगोर के अनुसार, इस पद को विपक्ष को न देना लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ है और इससे संस्थागत संतुलन प्रभावित होता है। कांग्रेस सांसद ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव का जिक्र करते हुए कहा कि ऐसे समय में डिप्टी स्पीकर का पद खाली होना और भी गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने आरोप लगाया कि क्या यह जवाबदेही से बचने की रणनीति है? टैगोर ने कहा, “जब स्पीकर के खिलाफ नो-कॉन्फिडेंस मोशन लाया गया है, तब डिप्टी स्पीकर का न होना इस खालीपन को और स्पष्ट करता है। क्या यह सुशासन है या जवाबदेही का डर?”

ये भी लगाया आरोप

टैगोर ने यह भी आरोप लगाया कि स्पीकर पर पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने और विपक्षी नेताओं को बोलने से रोकने के आरोप लगे हैं। ऐसे में, डिप्टी स्पीकर की अनुपस्थिति लोकतांत्रिक विमर्श को प्रभावित कर सकती है। उन्होंने कहा कि विपक्ष को उसकी संवैधानिक भूमिका से वंचित करना संस्थाओं को कमजोर करने जैसा है। हालांकि, सरकार की ओर से इस मुद्दे पर अभी तक कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि डिप्टी स्पीकर का पद लंबे समय से खाली रहने का मुद्दा विपक्ष के लिए सरकार को घेरने का एक अहम हथियार बन सकता है।

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