KNEWS DESK- आज 1 फरवरी को संसद में पेश होने जा रहा केंद्रीय बजट 2025-26 देश की आर्थिक दिशा तय करने वाला अहम दस्तावेज माना जा रहा है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण लगातार नौवीं बार बजट पेश कर इतिहास रचने जा रही हैं। ऐसे समय में जब आम आदमी से लेकर उद्योग जगत तक कई मोर्चों पर उम्मीदें टिकी हैं, यह बजट नीतिगत स्पष्टता और भरोसे का संदेश देने वाला हो सकता है।
इस बजट से टैक्सपेयर्स को राहत की आस है। मिडिल क्लास लंबे समय से इनकम टैक्स स्लैब में बदलाव, स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ाने और सरल टैक्स व्यवस्था की मांग कर रहा है। वहीं युवा वर्ग के लिए रोजगार सृजन, स्टार्टअप्स को बढ़ावा और स्किल डेवलपमेंट पर फोकस रहने की संभावना है।
किसानों की निगाहें भी बजट पर टिकी हैं। न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP), कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर, सिंचाई परियोजनाएं और ग्रामीण क्रेडिट को लेकर सरकार से ठोस ऐलानों की उम्मीद की जा रही है। ग्रामीण मांग को मजबूत करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल हो सकता है, ताकि आर्थिक विकास की रफ्तार को संतुलन मिल सके।
Economic Survey 2025-26 के अनुसार भारत की FY27 में आर्थिक वृद्धि दर 6.8% से 7.2% के बीच रह सकती है। सर्वे में घरेलू मांग को मजबूत बताया गया है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था की बड़ी ताकत बनी हुई है। हालांकि, वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव, ऊंची ब्याज दरें और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अनिश्चितता जैसे जोखिम भी सामने हैं।
ऐसे में बजट से यह संकेत मिलने की उम्मीद है कि सरकार विकास और वित्तीय अनुशासन के बीच संतुलन कैसे साधेगी। इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश, मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा, ग्रीन एनर्जी और डिजिटल इकॉनमी जैसे क्षेत्रों पर खास जोर देखने को मिल सकता है। निवेशकों के लिए स्थिर नीतियां और कैपेक्स पर फोकस बाजारों में भरोसा बढ़ा सकता है।
कुल मिलाकर, केंद्रीय बजट 2025-26 से यह उम्मीद की जा रही है कि वह न सिर्फ आर्थिक सर्वे के संकेतों को जमीन पर उतारेगा, बल्कि बदलते वैश्विक हालात में भारत की विकास यात्रा को मजबूत और सुरक्षित दिशा भी देगा।