अब ‘सेवा तीर्थ’ से चलेगा देश का पावर सेंटर, पीएम मोदी ने किया नए PMO परिसर का उद्घाटन

KNEWS DESK- PM मोदी ने शुक्रवार को नए प्रधानमंत्री कार्यालय परिसर ‘सेवा तीर्थ’ का उद्घाटन किया। दोपहर करीब 1:30 बजे उन्होंने भवन परिसर के नाम का अनावरण किया। इसके साथ ही देश का प्रशासनिक पावर सेंटर औपचारिक रूप से नए परिसर में शिफ्ट हो गया। अब प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (NSCS) और कैबिनेट सचिवालय एक ही कैंपस से संचालित होंगे।

सरकार का कहना है कि 2014 के बाद से औपनिवेशिक प्रतीकों से आगे बढ़ते हुए शासन व्यवस्था को भारतीय जनभावना और आधुनिक जरूरतों के अनुरूप ढालने की दिशा में लगातार कदम उठाए गए हैं। इसी क्रम में साउथ ब्लॉक का नाम ‘सेवा तीर्थ’, सेंट्रल सचिवालय का ‘कर्तव्य भवन’, राजपथ का ‘कर्तव्य पथ’, रेस कोर्स रोड का ‘लोक कल्याण मार्ग’ और राज भवन/राज निवास का ‘लोक भवन/लोक निवास’ किया गया।

दशकों तक केंद्र सरकार के अहम मंत्रालय और दफ्तर सेंट्रल विस्टा क्षेत्र में अलग-अलग और पुराने भवनों से संचालित होते रहे, जिससे समन्वय की कमी, रखरखाव लागत और कार्य वातावरण से जुड़ी समस्याएं सामने आती थीं। नए परिसर में प्रशासनिक इकाइयों को एक ही स्थान पर समेकित कर इन चुनौतियों का समाधान करने का प्रयास किया गया है।

1910 से 1930 के बीच बने नॉर्थ और साउथ ब्लॉक अपनी भव्यता और औपनिवेशिक वास्तुशैली के प्रतीक थे—ऊंचे स्तंभ, गुंबद और लाल-बफ सैंडस्टोन उस दौर की पहचान थे। लेकिन नया सेवा तीर्थ-कर्तव्य भवन परिसर सत्ता के नजरिये, कार्यसंस्कृति और वास्तु-दर्शन में बदलाव को दर्शाता है। यहां सादगी, पारदर्शिता और कार्यकुशलता पर जोर दिया गया है।

कर्तव्य भवन-1 और 2 में डिजिटल तकनीकों से लैस कार्यालय, जनता से संवाद के लिए सार्वजनिक क्षेत्र और केंद्रीकृत रिसेप्शन की व्यवस्था है। भवनों को 4-स्टार GRIHA मानकों के अनुरूप डिजाइन किया गया है, जिसमें नवीकरणीय ऊर्जा, जल संरक्षण, अपशिष्ट प्रबंधन और ऊर्जा-कुशल निर्माण तकनीकों का उपयोग हुआ है।

सुरक्षा के लिहाज से यहां स्मार्ट एक्सेस कंट्रोल, उन्नत सर्विलांस नेटवर्क और एडवांस इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम लगाए गए हैं। ओपन-प्लान ऑफिस मॉडल से अधिकारियों के बीच बेहतर तालमेल और तेज निर्णय प्रक्रिया को बढ़ावा देने का लक्ष्य है।

नया PMO ‘ओपन फ्लोर’ मॉडल पर आधारित है। पहले की तरह बंद कमरों की व्यवस्था के बजाय यहां खुले और जुड़े कार्यक्षेत्र बनाए गए हैं। प्रधानमंत्री के निजी कक्ष और उच्च स्तरीय बैठक कक्षों को भी आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया गया है, जहां विदेशी राष्ट्राध्यक्षों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडलों के साथ बैठकें हो सकेंगी।

इस भवन की खासियत यह भी है कि इसमें आधुनिक वास्तुकला के साथ भारतीय सांस्कृतिक तत्वों को जोड़ा गया है। पारंपरिक सौंदर्य और समकालीन डिजाइन का यह मेल नए भारत की प्रशासनिक सोच को दर्शाता है—जहां आधुनिकता और भारतीय पहचान साथ-साथ चलती है।

सरकार का मानना है कि ‘सेवा तीर्थ’ सिर्फ एक नई इमारत नहीं, बल्कि प्रशासनिक कार्यशैली में बदलाव और अधिक जन-केंद्रित शासन का प्रतीक है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *