KNEWS DESK- महाराष्ट्र में जारी निकाय चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी चरम पर है। लंबे समय बाद ठाकरे परिवार एकजुट होकर चुनाव मैदान में उतरा है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के अध्यक्ष राज ठाकरे न सिर्फ मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं, बल्कि संयुक्त रूप से प्रचार भी कर रहे हैं। इसी बीच राज ठाकरे के हालिया बयानों ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।
शिवसेना के मुखपत्र सामना को दिए गए इंटरव्यू में राज ठाकरे ने हिंदुत्व, मराठी अस्मिता और मुसलमानों को लेकर बेबाक राय रखी। संजय राउत और महेश मांजरेकर द्वारा लिए गए इस इंटरव्यू में राज ठाकरे ने कहा कि हर राज्य की संस्कृति अलग होती है और उसी के अनुसार वहां के लोग भी अलग पहचान रखते हैं।
राज ठाकरे ने कहा, “जिस तरह हर राज्य का हिंदू अलग होता है, उसी तरह हर राज्य का मुसलमान भी अलग होता है। महाराष्ट्र में पीढ़ियों से रहने वाला मुसलमान मराठी मुसलमान है, वह मराठी भाषी है।” उन्होंने यह भी याद दिलाया कि 2009-10 के दौरान हज कमेटी में उत्तर प्रदेश-बिहार के लोगों के वर्चस्व के खिलाफ मनसे ने आंदोलन किया था, ताकि महाराष्ट्र के मराठी मुसलमानों को हज पर जाने का अवसर मिल सके।
उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में बड़ी संख्या में ऐसे मुसलमान हैं जो मराठी संस्कृति और भाषा से जुड़े हुए हैं। उदाहरण देते हुए राज ठाकरे ने कहा, “हमारे सलीम मामा हैं, वे भी मराठी मुसलमान हैं।”
हिंदुत्व विरोधी होने की संभावित आलोचना पर राज ठाकरे ने सवाल उठाते हुए कहा, “इसका हिंदुत्व से क्या संबंध है? मान लीजिए मैं मंदिर में माथा टेकता हूं, लेकिन अगर मुझसे गंगा का पानी पीने को कहा जाए तो मैं नहीं पिऊंगा। गंगा जहां से निकलती है, वहां का पानी शायद पी लूं।” इस पर उद्धव ठाकरे ने भी कहा कि वे हाल ही में एक मुस्लिम उम्मीदवार के कार्यालय में गए थे।
पूर्व भारतीय क्रिकेटर जहीर खान का जिक्र करते हुए राज ठाकरे ने कहा कि वे भी मराठी हैं और जब भी मुलाकात होती है तो मराठी में ही बातचीत करते हैं।
सामना में प्रकाशित इंटरव्यू के दूसरे हिस्से में ठाकरे बंधुओं ने बीजेपी पर तीखा हमला बोला। दोनों नेताओं ने एक स्वर में कहा कि मराठी अस्मिता, मुंबई और महाराष्ट्र के भविष्य को लेकर जनता को एकजुट होना होगा। उन्होंने दावा किया कि बीजेपी की भी “एक्सपायरी डेट” है और चुनावी फायदे के लिए मराठी वोटों को बांटने की कोशिश की जा रही है।
मुंबई के महापौर पद को लेकर भी दोनों नेताओं ने साफ कहा कि मुंबई का महापौर मराठी ही होगा। उन्होंने बीजेपी के “हिंदू महापौर” वाले बयान पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या मराठी हिंदू नहीं है। ठाकरे बंधुओं ने इस तरह के बयानों को मराठी अस्मिता पर सीधा हमला बताया।