नीतीश के राज्यसभा जाने के ऐलान पर तेजस्वी यादव का हमला, बोले- बिहार में बीजेपी लागू कर रही ‘महाराष्ट्र मॉडल’

KNEWS DESK- बिहार के मुख्यमंत्री Nitish Kumar के सीएम पद छोड़कर राज्यसभा जाने के ऐलान के बाद राज्य की राजनीति गरमा गई है। इस फैसले को लेकर विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। तेजस्वी यादव ने कहा कि बिहार में अब ‘महाराष्ट्र मॉडल’ लागू किया जा रहा है और भाजपा एक “रबर स्टैंप” मुख्यमंत्री बनाना चाहती है।

तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (Twitter) पर पोस्ट करते हुए कहा कि उन्होंने पहले ही भविष्यवाणी कर दी थी कि चुनाव के बाद नीतीश कुमार मुख्यमंत्री नहीं रहेंगे। उनके मुताबिक, भाजपा की रणनीति शुरू से ही यही थी कि चुनाव के बाद सत्ता की कमान पूरी तरह अपने हाथ में ले ली जाए।

उन्होंने कहा, “हमने पहले ही कहा था कि भाजपा नीतीश कुमार को ज्यादा दिन तक मुख्यमंत्री नहीं रहने देगी। आज वही बात सच हो गई है। अगर हम सरकार में होते तो यह दिन देखने को नहीं मिलता।” तेजस्वी ने यह भी कहा कि उन्हें नीतीश कुमार के प्रति सहानुभूति है और जो कुछ हो रहा है वह बिहार की जनता की आकांक्षाओं के खिलाफ है।

आरजेडी नेता ने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह धीरे-धीरे जनता दल यूनाइटेड को खत्म करने की रणनीति पर काम कर रही है। तेजस्वी यादव ने कहा कि पिछड़े वर्ग के नेताओं को भाजपा अपने साथ ज्यादा समय तक टिकने नहीं देती।

उन्होंने यह भी याद दिलाया कि जब 2024 में नीतीश कुमार ने महागठबंधन छोड़कर भाजपा के साथ सरकार बनाई थी, तब भी उन्होंने चेतावनी दी थी कि भाजपा अंततः जेडीयू को कमजोर कर देगी। तेजस्वी के मुताबिक, अब वही स्थिति सामने आ रही है।

तेजस्वी यादव ने हालिया चुनाव परिणामों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यह जीत “धनतंत्र और मशीनतंत्र” की जीत है। उन्होंने दावा किया कि आने वाले समय में जेडीयू का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है।

आरजेडी नेता ने कहा कि अगर नीतीश कुमार उनके साथ रहते, तो उन्हें ऐसी स्थिति का सामना नहीं करना पड़ता। उन्होंने दोहराया कि उन्हें नीतीश कुमार के प्रति व्यक्तिगत रूप से सहानुभूति है, लेकिन वर्तमान राजनीतिक घटनाक्रम बिहार की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत दे रहा है।

नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने और बिहार में संभावित नेतृत्व परिवर्तन को लेकर अब सियासी हलचल और तेज हो गई है। विपक्ष इसे भाजपा की रणनीति बता रहा है, जबकि सत्ताधारी दल इसे नीतीश कुमार का व्यक्तिगत निर्णय बता रहा है।

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