अहमदाबाद में विकास परियोजना को सुप्रीम कोर्ट की हरी झंडी, हंसोल गांव में पेड़ों की कटाई पर दखल से इनकार

डिजिटल डेस्क- अहमदाबाद के हंसोल गांव के पास चल रही एक बड़ी विकास परियोजना को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। परियोजना के दूसरे चरण के लिए हो रही बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई पर रोक लगाने की मांग को कोर्ट ने खारिज कर दिया है। शीर्ष अदालत ने इस मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए कहा कि विकास और पर्यावरण दोनों को साथ-साथ चलना होगा। यह याचिका हंसोल गांव के एक स्थानीय निवासी द्वारा दायर की गई थी। याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया था कि परियोजना के दूसरे चरण के लिए लगभग 4 हजार परिपक्व पेड़ों की कटाई कर दी गई है। याचिका में दावा किया गया कि यह कोई सामान्य हरित क्षेत्र नहीं, बल्कि 50 से 60 साल पुराना एक विकसित जंगल था, जिसे पूरी तरह समाप्त कर दिया गया।

CJI की टिप्पणी- संतुलन जरूरी

मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी देश के लिए विकास जरूरी है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि पर्यावरण की पूरी तरह अनदेखी की जाए। हालांकि, इस मामले में कोर्ट ने माना कि जिस क्षेत्र में पेड़ों की कटाई की गई है, वहां मौजूद पेड़ जंगली प्रकृति के थे और उनके पुनः उगने में अत्यधिक कठिनाई नहीं होगी। याचिका में यह भी कहा गया था कि एक पुराने और परिपक्व पेड़ को नए पौधे से नहीं बदला जा सकता, क्योंकि एक पेड़ को बड़ा होने में दशकों लग जाते हैं। इसके बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने यह मानते हुए दखल से इनकार कर दिया कि परियोजना के लिए जरूरी वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन किया गया है और कटाई पूरी तरह अवैध नहीं है।

कानूनी विकल्प तलाशने की बात

याचिकाकर्ता की ओर से यह दलील भी दी गई थी कि अधिकारियों ने परियोजना के लिए कोई वैकल्पिक स्थान तलाशने का प्रयास नहीं किया। साथ ही किसानों के लिए जारी अधिसूचना के नाम पर नियमों की अनदेखी कर पेड़ काटे गए। लेकिन कोर्ट ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया और कहा कि हर मामले में न्यायिक हस्तक्षेप जरूरी नहीं होता। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद विकास परियोजना से जुड़े विभागों को बड़ी राहत मिली है। अब परियोजना का दूसरा चरण बिना किसी कानूनी अड़चन के आगे बढ़ सकेगा। हालांकि पर्यावरणविदों और स्थानीय लोगों में इस फैसले को लेकर नाराजगी भी देखने को मिल रही है।

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