KNEWS DESK – मौनी अमावस्या पर त्रिवेणी संगम में पवित्र स्नान को लेकर जारी विवाद के बीच शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ तीखा रुख अपनाया है. उन्होंने न सिर्फ मौजूदा विवाद को पीछे छोड़ने की बात कही, बल्कि अब एक नई और सख्त शर्त भी रख दी है. शंकराचार्य ने स्पष्ट कहा कि गौमांस के निर्यात को तुरंत बंद किया जाए और 40 दिनों के भीतर गौ माता को राष्ट्रमाता घोषित किया जाए.
अब दिल्ली नहीं, लखनऊ से होगा आंदोलन
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने ऐलान किया कि अब वह दिल्ली की बजाय लखनऊ में बैठकर आंदोलन करेंगे. उन्होंने कहा कि माघ स्नान का मुद्दा अब खत्म हो चुका है. मंत्री जी को सारी बातें पहले ही बता दी गई थीं और 11 दिन तक प्रयागराज में बैठकर सरकार को मौका भी दिया गया, लेकिन अब माफी मांगने का समय खत्म हो चुका है. उनका आरोप है कि अधिकारी क्षमा याचना करने के बजाय उन्हें “लोभ” देने की कोशिश कर रहे थे.
10-11 मार्च को संत समाज के साथ लखनऊ कूच
शंकराचार्य ने बताया कि 10 और 11 मार्च को वह संत समाज के साथ लखनऊ जाएंगे. 11 मार्च को वहीं संतों के साथ आगे की रणनीति और निर्णय लिया जाएगा. उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से सीधे तौर पर मांग की कि गोमांस के निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाए.
‘मुझसे सबूत मांगा गया, अब आपको देना होगा’
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोप लगाया कि उनसे शंकराचार्य होने का प्रमाण मांगा गया था और 24 घंटे में जवाब देने को कहा गया था. उन्होंने कहा कि उन्होंने समय पर जवाब दे दिया और अब तक उनके उत्तर को खारिज नहीं किया गया है, जिसका मतलब है कि उनका पक्ष सही था. इसके साथ ही उन्होंने पलटवार करते हुए कहा कि अब सरकार और प्रशासन को भी हिंदू होने का प्रमाण देना होगा. उनका कहना था कि हिंदुत्व सिर्फ भाषणों से साबित नहीं होता.
‘गौ सेवा हिंदुत्व की पहली शर्त’
शंकराचार्य ने कहा कि गौ सेवा हिंदुत्व का पहला पायदान है और हिंदू होने की पहली शर्त गौ माता का रक्षक होना है. उन्होंने सरकार को 40 दिनों का समय देते हुए कहा कि वह खुद को हिंदू और गौभक्त हिंदू साबित करे. यदि ऐसा नहीं हुआ, तो उन्हें “छद्म हिंदू” करार दिया जाएगा.
उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि गौ माता के मांस को भैंस का मांस बताकर बेचा जा रहा है और इसी के जरिए डॉलर कमाने की कोशिश हो रही है. शंकराचार्य ने दो टूक कहा कि 40 दिनों में गौ माता को राष्ट्रमाता घोषित किया जाए, वरना सरकार की नीयत पर सवाल उठेंगे.
प्रयागराज स्नान पर क्या बोले शंकराचार्य
प्रयागराज में दोबारा स्नान के सवाल पर शंकराचार्य ने कहा कि अब वह मुद्दा पीछे छूट चुका है. अब लड़ाई असली हिंदू और नकली हिंदू के बीच की है. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अधिकारी बहुत कुछ कहना चाहते थे, लेकिन खुलकर सामने नहीं आए और अपनी बात स्वीकार नहीं की.