KNEWS DESK- संभल हिंसा मामले में चंदौसी स्थित मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) कोर्ट ने बड़ा और अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने संभल में तैनात रहे तत्कालीन सीओ सदर और वर्तमान में ASP अनुज चौधरी समेत 12 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं। यह आदेश 24 नवंबर 2024 को शाही जामा मस्जिद क्षेत्र में हुए सर्वे के दौरान भड़की हिंसा और एक नाबालिग की मौत से जुड़े मामले में दिया गया है।
24 नवंबर 2024 को संभल के शाही जामा मस्जिद इलाके में सर्वे के दौरान हालात अचानक बिगड़ गए थे। देखते ही देखते हजारों लोगों की भीड़ जमा हो गई और क्षेत्र में पथराव व फायरिंग की घटनाएं सामने आईं। इस हिंसा में कई पुलिसकर्मी और स्थानीय लोग घायल हुए थे।
इसी दौरान मोहल्ला खगूसराय निवासी नाबालिग आलम को गोली लग गई थी। गंभीर रूप से घायल आलम को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां बाद में उसकी मौत हो गई।
आलम के पिता यामीन ने इस घटना को लेकर चंदौसी स्थित CJM कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। याचिका में आरोप लगाया गया कि आलम बिस्कुट बेचने के लिए निकला था और जामा मस्जिद क्षेत्र में पहुंचते ही पुलिस की गोली का शिकार हो गया। याचिकाकर्ता ने पुलिस पर सीधे फायरिंग करने का आरोप लगाया था।
मंगलवार को हुई सुनवाई के बाद CJM कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया जांच आवश्यक है। इसी के तहत कोर्ट ने ASP अनुज चौधरी समेत 12 पुलिसकर्मियों पर FIR दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।
CJM कोर्ट के आदेश में तत्कालीन सीओ सदर रहे अनुज चौधरी के साथ-साथ पूर्व सदर कोतवाल अनुज तोमर सहित कुल 12 पुलिसकर्मियों के नाम शामिल हैं। घटना के समय अनुज चौधरी संभल में सीओ सदर के पद पर तैनात थे। बाद में उन्हें पदोन्नति देकर ASP बनाया गया और फिर उनका तबादला फिरोजाबाद कर दिया गया था।
कोर्ट के इस आदेश के बाद अब मामले में पुलिसकर्मियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है। एफआईआर दर्ज होने के बाद जांच एजेंसियां यह तय करेंगी कि नाबालिग की मौत किन परिस्थितियों में हुई और इसमें जिम्मेदारी किसकी बनती है।
यह मामला न केवल संभल हिंसा की सच्चाई सामने लाने के लिहाज से अहम माना जा रहा है, बल्कि पुलिस कार्रवाई और जवाबदेही को लेकर भी कई सवाल खड़े करता है।