KNEWS DESK- भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद बंद करने को लेकर चल रही अटकलों के बीच रूस ने बड़ा बयान दिया है। रूस ने मंगलवार को साफ कहा कि उसे भारत की ओर से रूसी तेल आयात रोकने को लेकर कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है। साथ ही यह भी कहा गया कि वह भारत के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करना चाहता है।
रूस का यह बयान ऐसे समय आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील का ऐलान किया था।
India–US Trade Deal के बाद रूस की प्रतिक्रिया
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया था कि भारत के साथ ट्रेड डील के तहत अमेरिका को निर्यात होने वाले भारतीय उत्पादों पर टैरिफ 50% से घटाकर 18% कर दिया जाएगा। इसके बदले भारत, रूस से तेल खरीदना बंद करेगा। हालांकि, रूस ने इस दावे पर फिलहाल कोई सहमति नहीं जताई है।
क्रेमलिन का बयान: भारत हमारे लिए अहम साझेदार
न्यूज़ एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने कहा—“रूस, भारत के साथ अपने संबंधों को बेहद अहम मानता है और इस रणनीतिक साझेदारी को आगे भी विकसित करता रहेगा।” इस बयान को भारत-रूस रिश्तों की मजबूती के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
भारत की तेल जरूरत और रूस की भूमिका
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। भारत अपनी कुल तेल जरूरत का करीब 90% आयात करता है। इसमें से लगभग 35% कच्चा तेल रूस से आता है। ऐसे में रूस से तेल आयात बंद करना भारत के लिए एक बड़ा रणनीतिक और आर्थिक फैसला होगा।
अमेरिका को रूस से तेल पर क्यों है आपत्ति?
अमेरिका बीते कई दिनों से भारत पर रूस से तेल खरीद बंद करने का दबाव बना रहा है। अमेरिका का आरोप है कि भारत द्वारा रूसी तेल खरीदने से रूस को यूक्रेन युद्ध में आर्थिक मदद मिल रही है। इसी वजह से अमेरिका ने भारत पर पहले से लगे 25% टैरिफ के अलावा 25% पेनल्टी टैरिफ और लगाया था। अब इस कुल टैरिफ को घटाकर 18% करने का ऐलान किया गया है।
ट्रंप का दावा: अमेरिका और वेनेजुएला से खरीदेगा भारत तेल
ट्रंप ने कहा है कि भारत अब—रूस से तेल नहीं खरीदेगा। बल्कि अमेरिका और संभवतः वेनेजुएला से ज्यादा तेल आयात करेगाहालांकि, इस पर भारत सरकार की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।
भारत-रूस की दोस्ती का पुराना इतिहास
भारत और रूस के रिश्ते दशकों पुराने हैं। आजादी के बाद से ही रूस संकट के समय भारत के साथ खड़ा रहा। 1971 के भारत-पाक युद्ध में संयुक्त राष्ट्र में भारत का समर्थन किया। ऐसे कई मौके आए जब अमेरिका ने भारत से दूरी बनाई, लेकिन रूस ने भारत का साथ नहीं छोड़ा।
भारत की ओर से रूसी तेल आयात पर आधिकारिक रुख सामने आने के बाद ही तस्वीर पूरी तरह साफ होगी। फिलहाल रूस के बयान से इतना जरूर संकेत मिलता है कि भारत-रूस संबंधों में दरार की पुष्टि नहीं हुई है।