Rupee vs Dollar: RBI के सख्त कदम से रुपये की जोरदार वापसी, 128 पैसे उछलकर 93.57 पर पहुंचा

KNEWS DESK: शेयर बाजार में भारी गिरावट के बीच भारतीय मुद्रा को बड़ी राहत मिली है। सोमवार, 30 मार्च को शुरुआती कारोबार में रुपया अपने ऑल-टाइम लो से उभरते हुए 128 पैसे मजबूत हुआ और डॉलर के मुकाबले 93.57 के स्तर पर पहुंच गया। यह उछाल शुक्रवार के बंद भाव 94.85 के मुकाबले करीब 1.3% की मजबूती दर्शाता है।

इस रिकवरी के पीछे भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) का बड़ा दखल माना जा रहा है, जिसने विदेशी मुद्रा बाजार में सट्टेबाजी पर लगाम कस दी है।

RBI का ‘मास्टरस्ट्रोक’ क्या है?रुपये में लगातार गिरावट को रोकने के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक ने बैंकों के लिए नई गाइडलाइन जारी की है। इसके तहत बैंकों को विदेशी मुद्रा बाजार में अपनी ‘नेट ओपन पोजीशन’ (NOP) को 100 मिलियन डॉलर तक सीमित रखने का निर्देश दिया गया है।

इसका मतलब साफ है कि बैंक अब बड़े पैमाने पर डॉलर जमा करके सट्टेबाजी नहीं कर पाएंगे। यह नियम 10 अप्रैल तक लागू करना अनिवार्य किया गया है।

अनुमान है कि बैंकों के पास 25 से 50 अरब डॉलर तक की ओपन पोजीशन हो सकती है, जिसे अब धीरे-धीरे बाजार में बेचना पड़ेगा। इससे डॉलर की सप्लाई बढ़ेगी और रुपये को मजबूती मिलेगी।

एक्सपर्ट्स क्या कह रहे हैं?

मार्केट एक्सपर्ट और CR Forex Advisors के एमडी अमित पाबरी के मुताबिक, बैंकों द्वारा अपनी डॉलर होल्डिंग कम करने की प्रक्रिया (Position Unwinding) ही फिलहाल रुपये की मजबूती की मुख्य वजह है।

उनका कहना है कि यह सुधार शॉर्ट टर्म में राहत जरूर देगा, लेकिन इसे अभी स्थायी मजबूती नहीं माना जा सकता। ग्लोबल फैक्टर्स अभी भी रुपये पर दबाव बनाए हुए हैं।

कच्चा तेल और युद्ध बना बड़ा खतरा

भले ही RBI के कदम से रुपये को सहारा मिला हो, लेकिन अंतरराष्ट्रीय हालात अभी भी चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और हूती विद्रोहियों के हमलों के चलते ब्रेंट क्रूड की कीमत 116 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है।

भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल आयात करता है, ऐसे में तेल महंगा होने का सीधा असर डॉलर की मांग पर पड़ता है, जिससे रुपया फिर दबाव में आ सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की ‘गोल्डिलॉक्स’ स्थिति (उच्च विकास और कम महंगाई) पर भी असर पड़ सकता है और आगे चलकर ग्रोथ में कमी व महंगाई बढ़ने की आशंका है।

शेयर बाजार में मचा हाहाकाररुपये की मजबूती के बावजूद शेयर बाजार में सोमवार को बड़ी गिरावट देखने को मिली।

  • सेंसेक्स करीब 1,191 अंक तक लुढ़का
  • निफ्टी में 349 अंकों की गिरावट दर्ज हुई

विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भी बाजार से दूरी बनाई हुई है। शुक्रवार को ही उन्होंने भारतीय शेयर बाजार से ₹4,367.30 करोड़ की बिकवाली की थी।

इसके अलावा डॉलर इंडेक्स का 100 के ऊपर बने रहना भी वैश्विक मुद्राओं के लिए दबाव का संकेत है।

आगे की राह

फिलहाल भारतीय रिज़र्व बैंक के हस्तक्षेप से रुपये को राहत जरूर मिली है, लेकिन वैश्विक बाजार, कच्चे तेल की कीमतें और भू-राजनीतिक तनाव आगे भी इसकी दिशा तय करेंगे।

कुल मिलाकर, शॉर्ट टर्म में राहत के संकेत हैं, लेकिन लंबी अवधि में चुनौतियां अभी बरकरार हैं।

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