डिजिटल डेस्क- तेलंगाना विधानसभा में सोमवार को जोरदार राजनीतिक घमासान देखने को मिला, जब सदन की कार्यवाही के दौरान लगातार हंगामा और बाधा उत्पन्न करने के आरोप में भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के 24 विधायकों को दो दिनों के लिए निलंबित कर दिया गया। इस कार्रवाई के बाद राज्य की राजनीति गरमा गई है और विपक्ष ने सरकार पर लोकतंत्र की आवाज दबाने का आरोप लगाया है। पूरा विवाद राज्य के राजस्व मंत्री पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी पर लगे कथित भ्रष्टाचार और अवैध खनन के आरोपों से जुड़ा है। जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू हुई, मुख्य विपक्षी दल भारत राष्ट्र समिति के विधायक इस मुद्दे को लेकर आक्रामक हो गए। उन्होंने आरोपों की निष्पक्ष जांच के लिए ‘हाउस कमेटी’ गठित करने की मांग की और स्थगन प्रस्ताव लाने की कोशिश भी की।
प्रस्ताव खारिज करते ही भड़क उठे विधायक
हालांकि, विधानसभा अध्यक्ष गद्दाम प्रसाद कुमार ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया। इसके बाद विपक्षी विधायक भड़क उठे और नारेबाजी करते हुए सदन के वेल में पहुंच गए। हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही पूरी तरह ठप हो गई और माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया। दूसरी ओर, सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार ने विपक्ष की मांग को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि अवैध खनन के मामलों की जांच के लिए पहले ही सीबी-सीआईडी जांच के आदेश दिए जा चुके हैं। ऐसे में अलग से हाउस कमेटी बनाने की कोई आवश्यकता नहीं है। इस दौरान सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली। स्थिति तब और बिगड़ गई जब बीआरएस विधायक कौशिक रेड्डी ने कादियम श्रीहरि पर विवादित टिप्पणी कर दी, जिससे माहौल और गर्म हो गया।
सीएम ने विपक्ष पर साधा निशाना
मामले को लेकर मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि बीआरएस जानबूझकर सदन की कार्यवाही बाधित कर रही है। उन्होंने कहा कि विपक्ष हाउस कमेटी के बहाने मंत्री को ब्लैकमेल करने की कोशिश कर रहा है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि अगर विपक्ष के पास कोई ठोस सबूत हैं, तो उन्हें सीबी-सीआईडी के सामने पेश करना चाहिए। लगातार हंगामे के बीच स्पीकर ने विधायकों से कई बार शांति बनाए रखने की अपील की, लेकिन जब स्थिति नियंत्रण में नहीं आई तो उन्होंने सख्त कदम उठाते हुए 24 विधायकों को निलंबित कर दिया। निलंबित विधायकों में प्रमुख नेता टी हरीश राव, केटी रामा राव, श्रीनिवास यादव, जगदीश रेड्डी और गंगुला कमलाकर शामिल हैं। निलंबन के बाद बीआरएस विधायकों ने विधानसभा परिसर में ही धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया और सरकार के खिलाफ जोरदार विरोध जताया। उनका कहना है कि सरकार विपक्ष की आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है।