KNEWS DESK- Agra के बाह क्षेत्र स्थित बिजौली गांव इन दिनों चर्चा के केंद्र में है। फिल्म निर्माता-निर्देशक Rohit Shetty के मुंबई स्थित घर के बाहर हुई फायरिंग मामले में यहां के पांच युवकों की गिरफ्तारी के बाद पूरे इलाके में असमंजस और बेचैनी का माहौल है। परिजन और पड़ोसी आरोपों को सिरे से खारिज कर रहे हैं, जबकि जांच एजेंसियां संगठित आपराधिक नेटवर्क से जुड़ाव का दावा कर रही हैं।
31 जनवरी की रात मुंबई के जुहू स्थित रोहित शेट्टी के घर के बाहर फायरिंग की घटना हुई थी। 15 फरवरी को मुंबई क्राइम ब्रांच और हरियाणा एसटीएफ ने झज्जर से बिजौली के दीपक शर्मा, रितिक यादव, सनी जाटव और सोनू पुरवंशी को गिरफ्तार किया। वहीं विष्णु कुशवाह को यूपी एसटीएफ ने गांव से हिरासत में लिया।
जांच एजेंसियों के अनुसार, यह वारदात कथित तौर पर Lawrence Bishnoi gang से जुड़े नेटवर्क के इशारे पर अंजाम दी गई। पुलिस का दावा है कि मुख्य साजिशकर्ता विदेश में बैठा एक आरोपी है, जबकि स्थानीय युवकों ने रेकी और ठिकाना उपलब्ध कराने में भूमिका निभाई।
बाह थाना प्रभारी के अनुसार, पांचों युवकों के खिलाफ स्थानीय पुलिस रिकॉर्ड में कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है। यही बात गांव वालों के संदेह को और मजबूत कर रही है। पड़ोसियों का कहना है कि ये युवक सामान्य पृष्ठभूमि के हैं और मजदूरी या छोटे-मोटे काम कर परिवार चलाते थे।
गिरफ्तार युवकों के परिजन जांच एजेंसियों की कहानी को स्वीकार नहीं कर पा रहे। रितिक यादव के दादा का कहना है कि वह हरियाणा की एक कंपनी में सुपरवाइजर था और वहीं से पकड़ा गया। दीपक शर्मा की मां का सवाल है कि जब उनका बेटा दिल्ली में होटल में काम करता था, तो वह मुंबई कैसे पहुंच गया? सनी जाटव के परिवार का कहना है कि वह दिल्ली में सब्जी बेचकर घर चलाता था और बुजुर्ग दादी का सहारा था। विष्णु कुशवाह की बहनों का दावा है कि घटना के दिन वह गांव में ही मौजूद था और वे सीसीटीवी फुटेज जुटाने की कोशिश कर रही हैं। सोनू पुरवंशी के पिता का कहना है कि उनका बेटा मुंबई में सब्जी का फड़ लगाता था और उसे झूठा फंसाया गया है।
गांव की गलियों और चौपालों पर इन दिनों एक ही चर्चा है—क्या स्थानीय युवक वाकई किसी बड़े गैंग से जुड़े थे या उन्हें साजिशन फंसाया गया? कई ग्रामीण खुलकर कुछ कहने से बच रहे हैं, लेकिन परिवारों की आर्थिक स्थिति और हालात देखकर सहानुभूति जरूर जता रहे हैं।
गिरफ्तारी के बाद कुछ परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। बुजुर्ग माता-पिता और दादी-नानी दरवाजे पर बैठकर आने-जाने वालों से मदद की गुहार लगा रहे हैं।
मामला अब जांच के अहम चरण में है। एक ओर एजेंसियां संगठित आपराधिक नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी हैं, वहीं दूसरी ओर परिवार न्याय और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है—यदि युवक दोषी हैं तो उन्हें सजा मिले, लेकिन यदि निर्दोष हैं तो जल्द रिहाई हो ताकि परिवारों का सहारा वापस मिल सके।
बिजौली फिलहाल कानूनी लड़ाई, सामाजिक दबाव और अनिश्चितता के बीच खड़ा है। आने वाले दिनों में जांच की दिशा ही तय करेगी कि सच्चाई किस ओर है।