शिव शंकर सविता- उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में मौनी अमावस्या के महास्नान के दौरान ज्योतिषपीठ शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को पालकी से संगम स्नान के लिए जाने से रोके जाने का मामला अब बड़ा विवाद बन गया है। इस घटना के बाद न सिर्फ संत समाज में नाराजगी देखी गई, बल्कि प्रशासन और शंकराचार्य के बीच तीखी बयानबाजी भी शुरू हो गई है। माघ मेला प्रशासन ने इस पूरे विवाद के बीच स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस जारी कर दिया है, जिसमें उनके द्वारा “शंकराचार्य” पद के इस्तेमाल पर सवाल उठाए गए हैं। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रशासन पर आरोप लगाया कि मौनी अमावस्या जैसे पावन पर्व पर उनके साथ दुर्व्यवहार और अपमान किया गया। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने न केवल उन्हें पालकी से संगम स्नान के लिए जाने से रोका, बल्कि उनके शिष्यों के साथ भी गलत व्यवहार किया गया। शंकराचार्य का दावा है कि पुलिस उनके करीब 35 शिष्यों को थाने ले गई, जहां उनके साथ मारपीट की गई। उन्होंने दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।
माघ मेला प्राधिकरण का नोटिस
प्रयागराज माघ मेला प्राधिकरण की ओर से जारी नोटिस में सुप्रीम कोर्ट में चल रहे एक मामले का हवाला दिया गया है। नोटिस में बताया गया कि ज्योतिषपीठ शंकराचार्य पद को लेकर सिविल अपील संख्या 3010/2020 और 3011/2020 सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। 17 अक्टूबर 2022 के आदेश के तहत जब तक मामले का निस्तारण नहीं हो जाता, तब तक किसी भी धर्माचार्य का ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य के रूप में पट्टाभिषेक नहीं किया जा सकता। नोटिस में यह भी कहा गया है कि इसके बावजूद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद माघ मेला 2025-26 के दौरान अपने शिविर में लगे बोर्ड पर स्वयं को ज्योतिषपीठ का शंकराचार्य घोषित कर रहे हैं, जो सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना प्रतीत होती है। प्राधिकरण ने उनसे 24 घंटे के भीतर यह स्पष्ट करने को कहा है कि वे किस आधार पर अपने नाम के आगे “शंकराचार्य” शब्द का प्रयोग कर रहे हैं।
मेलाधिकारी और प्रशासन का पक्ष
मेलाधिकारी ऋषिराज ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को शंकराचार्य के तहत कोई विशेष प्रोटोकॉल नहीं दिया जा सकता। इसी वजह से उन्हें मेला क्षेत्र में “शंकराचार्य ज्योतिषपीठ” के नाम से नहीं, बल्कि “बद्रिका आश्रम सेवा शिविर” के नाम पर जमीन आवंटित की गई है। प्रशासनिक अधिकारियों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी उन्हें स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के नाम से ही संबोधित किया। मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल ने बताया कि मौनी अमावस्या से एक दिन पहले स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने दो वाहनों की अनुमति मांगी थी, लेकिन अत्यधिक भीड़ और सुरक्षा कारणों से इसकी अनुमति नहीं दी गई। इसके बावजूद वे बड़ी संख्या में समर्थकों के साथ पालकी पर सवार होकर संगम नोज के पास तक पहुंच गए, जिससे व्यवस्था प्रभावित हुई। पुलिस आयुक्त जोगेंद्र कुमार ने कहा कि पीपा पुल नंबर दो पहले से बंद था और बैरिकेडिंग तोड़ने की घटना भी सामने आई है। हालांकि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा कि बैरिकेडिंग उनके शिष्यों ने नहीं, बल्कि सरकारी कर्मचारियों ने खुलवाई थी। उन्होंने इस संबंध में सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक करने की मांग की है।
हम ही हैं शंकराचार्य: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद
शंकराचार्य पद को लेकर उठ रहे सवालों पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने साफ कहा कि शंकराचार्य कौन होगा, यह प्रशासन तय नहीं करता। उन्होंने दावा किया कि चार पीठों में से तीन पीठों के शंकराचार्य उन्हें मान्यता देते हैं और पिछले माघ मेले में वे उनके साथ संगम स्नान भी कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि वे माघ मेला छोड़कर नहीं जाएंगे, लेकिन जब तक प्रशासन माफी नहीं मांगता और ससम्मान संगम स्नान नहीं कराता, तब तक वे अपने शिविर में प्रवेश नहीं करेंगे।