डिजिटल डेस्क- उत्तर प्रदेश के लोक निर्माण विभाग मुख्यालय में 19-20 मार्च की दरमियानी रात लगी आग अब बड़े सवालों के घेरे में आ गई है। आधिकारिक तौर पर इस घटना को शॉर्ट सर्किट बताया गया है, लेकिन विभागीय सूत्रों के दावों ने मामले को संदिग्ध बना दिया है। सूत्रों का कहना है कि आग में सड़क परियोजनाओं से जुड़ी अहम फाइलें, आकलन दस्तावेज और कंप्यूटर उपकरण जलकर नष्ट हो गए, जबकि विभाग इस दावे से इनकार कर रहा है। जानकारी के मुताबिक, यह आग निर्माण भवन स्थित प्रमुख अभियंता कार्यालय परिसर के कक्ष संख्या A-014 (आंबेडकर सेल) में लगी थी। 20 मार्च की सुबह जब कमरा खोला गया तो अंदर धुआं भरा हुआ था, हालांकि आग खुद ही बुझ चुकी थी। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि आग एक ही कमरे तक सीमित रही और किसी अन्य कक्ष या महत्वपूर्ण दस्तावेज को नुकसान नहीं पहुंचा।
कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों और फाइलों के जलने की है आशंका
लेकिन विभागीय सूत्रों की मानें तो सच्चाई कुछ और है। उनका दावा है कि इस आग में सड़क निर्माण से जुड़ी कई महत्वपूर्ण फाइलें, अनुमान दस्तावेज और कंप्यूटर सिस्टम पूरी तरह जल गए। खास बात यह है कि हाल के महीनों में सैकड़ों करोड़ रुपये के टेंडरों को लेकर विवाद भी सामने आए थे। ऐसे में इस घटना को लेकर संदेह और गहरा गया है कि कहीं यह सबूत मिटाने की कोशिश तो नहीं।
इस मामले पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए कहा, “चाहे फाइलें जल जाएं या कुछ और हो जाए, नई सरकार आने पर भ्रष्टाचार की जांच जरूर कराई जाएगी।” उन्होंने इशारों में कहा कि भले ही दस्तावेज नष्ट कर दिए जाएं, लेकिन जमीन पर बनी सड़कें गायब नहीं की जा सकतीं।
सपा सरकार आई तो होगी गहन जांच- अखिलेश यादव
अखिलेश यादव ने 2027 के विधानसभा चुनावों का जिक्र करते हुए संकेत दिया कि सत्ता परिवर्तन के बाद इस पूरे मामले की गहन जांच कराई जाएगी। उनके बयान से यह भी स्पष्ट होता है कि विपक्ष इस आग को संभावित घोटाले से जोड़कर देख रहा है। सूत्रों के मुताबिक, हाल ही में टेंडर आवंटन को लेकर कई विवाद सामने आए थे। इसके अलावा पिछले महीने एक विधायक के घर पर हुई छापेमारी के बाद इस आग की घटना को और भी संदिग्ध माना जा रहा है। विपक्ष का आरोप है कि यह आग “सबूत नष्ट करने की साजिश” का हिस्सा हो सकती है।