KNEWS DESK- पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने गुरमीत राम रहीम को 2002 के छत्रपति हत्याकांड मामले में सुनाए गए आरोपों के मामले में सबूतों के अभाव के कारण बरी कर दिया है। हाईकोर्ट ने सीबीआई की विशेष अदालत के फैसले को आंशिक रूप से संशोधित करते हुए राम रहीम को संशय का लाभ दिया।
हालांकि, मामले के अन्य तीन दोषी कुलदीप, निर्मल और किशन लाल की उम्रकैद की सजा बरकरार रखी गई है। यह निर्णय आरोपियों द्वारा सीबीआई अदालत के खिलाफ दायर अपीलों की सुनवाई के बाद आया।
हाईकोर्ट ने मामले से जुड़े साक्ष्यों और दलीलों का विस्तृत अध्ययन करने के बाद पाया कि गुरमीत राम रहीम के खिलाफ पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं। इस आधार पर अदालत ने उन्हें बरी कर दिया और संदेह का लाभ दिया।
राम रहीम को पहले इस मामले में 2019 में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। हालांकि, अन्य मामलों के चलते वह अभी रोहतक की सुनारिया जेल में ही बंद हैं। वह दो साध्वियों के साथ दुष्कर्म मामले में 20 साल की सजा भी काट रहे हैं। समय-समय पर उन्हें पैरोल पर बाहर आने की अनुमति मिलती रही है।
गुरमीत राम रहीम ने 2019 के फैसले के खिलाफ अपील दायर की थी। पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने आज अपील को स्वीकार करते हुए उन्हें बरी किया, जिससे राम रहीम को इस मामले में कानूनी बड़ी राहत मिली है।
इस फैसले से यह स्पष्ट हुआ कि सबूतों की कमी होने पर आरोपी को संदेह का लाभ मिल सकता है, जबकि अन्य दोषियों की सजा इस फैसले से प्रभावित नहीं हुई।