KNEWS DESK – विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए कानून को लेकर देशभर में विरोध तेज हो गया है। उत्तर प्रदेश से शुरू हुआ यह आंदोलन अब राजधानी दिल्ली तक पहुंच चुका है। सवर्ण समाज और सामान्य वर्ग के छात्र संगठनों ने यूजीसी के हालिया नियमों को समानता के खिलाफ बताते हुए मंगलवार, 26 जनवरी को सड़कों पर उतरने और यूजीसी का घेराव करने का ऐलान किया है।
क्यों भड़का विरोध?
प्रदर्शन कर रहे संगठनों का आरोप है कि यूजीसी के नए नियम शिक्षा व्यवस्था पर सीधा हमला हैं और इससे छात्रों के बीच जातिगत विभाजन को बढ़ावा मिलेगा। सवर्ण आर्मी के को-फाउंडर ठाकुर शिवम सिंह ने टीवी9 भारतवर्ष से बातचीत में कहा कि सरकार ऐसे नियमों के जरिए समाज में तनाव बढ़ाना चाहती है, जो देश की एकता और शांति के लिए खतरा बन सकता है।
किन नियमों को लेकर विवाद?
विरोध मुख्य रूप से यूजीसी के ‘प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशंस रेगुलेशंस, 2026’ को लेकर हो रहा है। सामान्य वर्ग के छात्रों और संगठनों का कहना है कि ये नियम ‘रिवर्स बायस’ यानी उल्टे भेदभाव को बढ़ावा दे सकते हैं।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि:
- झूठी शिकायतों के खिलाफ कोई सख्त दंडात्मक प्रावधान नहीं है
- नियम केवल SC, ST और OBC वर्ग को सुरक्षा देते हैं
- सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए भेदभाव से बचाव के स्पष्ट प्रावधान नहीं हैं
- ‘इक्विटी स्क्वॉड’ और निगरानी तंत्र से शैक्षणिक स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है
कहां-कहां हो रहे प्रदर्शन?
यूजीसी के इन नियमों के खिलाफ उत्तर प्रदेश, राजस्थान, बिहार समेत कई राज्यों के विश्वविद्यालयों में विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहा है। सोशल मीडिया पर भी #UGCRollback ट्रेंड कर रहा है, जहां छात्र और संगठन नियमों को वापस लेने की मांग कर रहे हैं।
सरकार और UGC का पक्ष
केंद्र सरकार और यूजीसी ने इन नियमों का बचाव करते हुए कहा है कि ये सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप हैं। यूजीसी का कहना है कि इन नियमों का उद्देश्य उच्च शिक्षण संस्थानों को भेदभाव मुक्त बनाना और सभी वर्गों को समान अवसर देना है।
नियमों के पक्ष में दलील
यूजीसी के अनुसार, नए नियमों में जाति-आधारित भेदभाव की परिभाषा को व्यापक बनाया गया है। इसमें SC, ST और OBC के साथ-साथ धर्म, लिंग, विकलांगता जैसे आधारों पर होने वाले भेदभाव को भी शामिल किया गया है। हर संस्थान में समान अवसर केंद्र (EOC) बनाना अनिवार्य किया गया है, ताकि शिकायतों का समाधान हो सके और जवाबदेही तय हो।
सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला
UGC के इन नए नियमों को अब सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है। एक जनहित याचिका में इन्हें संविधान के अनुच्छेद 14 के खिलाफ बताते हुए असंवैधानिक घोषित करने की मांग की गई है। 13 जनवरी को लागू हुए इन नियमों के खिलाफ अब कानूनी लड़ाई भी शुरू हो चुकी है।