प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ में AI, खेल भावना, अंगदान और साइबर सुरक्षा पर दिया जोर

KNEWS DESK- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ‘मन की बात’ कार्यक्रम के 131वें एपिसोड में देशवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि यह मंच देश और नागरिकों की उपलब्धियों को सामने लाने का सशक्त माध्यम बन चुका है। उन्होंने हाल ही में राजधानी में आयोजित Global AI Impact Summit का उल्लेख करते हुए कहा कि यह आयोजन भविष्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दिशा तय करने वाला महत्वपूर्ण पड़ाव साबित होगा।

प्रधानमंत्री ने बताया कि समिट में कई देशों के नेता, उद्योग जगत के प्रमुख और टेक्नोलॉजी विशेषज्ञ शामिल हुए। उन्होंने प्रदर्शनी में दो विशेष नवाचारों का उल्लेख किया। पहला, डेयरी सेक्टर में AI के उपयोग से जुड़ा था, जहां 24×7 डिजिटल सहायता के माध्यम से पशुओं के इलाज और प्रबंधन में किसानों को मदद मिल रही है।

दूसरा उदाहरण भारत की सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा था। प्रधानमंत्री ने बताया कि AI तकनीक की मदद से प्राचीन ग्रंथों और पांडुलिपियों को संरक्षित कर उन्हें पढ़ने योग्य बनाया जा रहा है। प्रदर्शनी में ‘सुश्रुत संहिता’ की पांडुलिपि को डिजिटल रूप में प्रस्तुत किया गया, जिसमें इमेज क्वालिटी सुधारकर टेक्स्ट में परिवर्तित करने की प्रक्रिया दिखाई गई।

प्रधानमंत्री ने कहा कि खेल हमें जोड़ने का माध्यम है। उन्होंने टी-20 विश्व कप का जिक्र करते हुए कहा कि कई बार विदेशी टीमों में भारतीय मूल के खिलाड़ियों को देखकर गर्व की अनुभूति होती है। यह भारत की वैश्विक उपस्थिति और प्रतिभा का प्रतीक है।

कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने केरल की 10 महीने की बच्ची आलिन शेरिन अब्राहम के निधन का जिक्र किया। उन्होंने बच्ची के माता-पिता के साहस की सराहना करते हुए कहा कि गहरे दुख के बावजूद उन्होंने अंगदान का निर्णय लिया, जो अत्यंत प्रेरणादायक है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह निर्णय मानवता और संवेदनशीलता का श्रेष्ठ उदाहरण है।

प्रधानमंत्री मोदी ने साइबर अपराधों के बढ़ते मामलों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि अक्सर वरिष्ठ नागरिकों या अभिभावकों की जीवनभर की कमाई ठगी का शिकार हो जाती है। उन्होंने लोगों से OTP, आधार नंबर या बैंक संबंधी जानकारी साझा न करने और समय-समय पर पासवर्ड बदलते रहने की अपील की।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जैसे मौसम के अनुसार हम अपनी दिनचर्या बदलते हैं, उसी तरह डिजिटल सुरक्षा को भी आदत का हिस्सा बनाना चाहिए।

कार्यक्रम के अंत में प्रधानमंत्री ने नागरिकों से सकारात्मक पहल, नवाचार और जागरूकता के माध्यम से देश की प्रगति में भागीदार बनने का आह्वान किया।

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