KNEWS DESK- इजराइल के लिए रवाना होंगे। आधिकारिक बयान के अनुसार यह दौरा भारत और इजराइल के बीच लंबे समय से चली आ रही रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है। इस यात्रा के दौरान दोनों देश साझा वैश्विक और क्षेत्रीय चुनौतियों की समीक्षा करेंगे और दो मजबूत लोकतंत्रों के बीच सहयोग के नए आयाम तलाशेंगे।
इजराइल के कई रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौरा केवल औपचारिकता नहीं है, बल्कि इससे रक्षा सहयोग में एक नया अध्याय शुरू हो सकता है। रक्षा तकनीक, साइबर सुरक्षा, ड्रोन सिस्टम, मिसाइल डिफेंस और खुफिया साझेदारी जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच पहले से ही गहरा सहयोग है, जिसे इस यात्रा के दौरान और विस्तार मिलने की संभावना है।
भारत, जो हिंद महासागर क्षेत्र में एक प्रमुख शक्ति है, और इजराइल, जो अत्याधुनिक रक्षा तकनीक का अग्रणी देश है, मिलकर क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे को नई दिशा दे सकते हैं।
Benjamin Netanyahu ने हाल ही में छह देशों के एक विशेष रणनीतिक गठबंधन का विचार सामने रखा है। इस प्रस्तावित समूह में इजराइल स्वयं केंद्र में होगा—तकनीक और रक्षा सहयोग के हब के रूप में। भारत को हिंद महासागर क्षेत्र की सुरक्षा और इंडो-अब्राहम सहयोग की अहम कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार, इजराइल भारत को कुछ विशेष और उन्नत तकनीक उपलब्ध कराने पर विचार कर सकता है। इसमें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित रक्षा प्रणाली, मिसाइल रोधी तकनीक और अत्याधुनिक निगरानी तंत्र शामिल हो सकते हैं। इससे भारत की रक्षा क्षमता और आत्मनिर्भरता को मजबूती मिलेगी।