77वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का देश के नाम संबोधन

KNEWS DESK – भारत के 77वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर रविवार (25 जनवरी) को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देशवासियों को संबोधित किया। अपने संदेश की शुरुआत में उन्होंने सभी नागरिकों को गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं दीं और बीते वर्ष की प्रमुख उपलब्धियों के साथ-साथ देश की प्राथमिकताओं की रूपरेखा पेश की।

अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने भारत की लोकतांत्रिक यात्रा, संवैधानिक मूल्यों और साझा जिम्मेदारियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि एक समृद्ध, आत्मनिर्भर और प्रगतिशील भारत के निर्माण के लिए एकता, समावेशिता और दृढ़ संकल्प बेहद जरूरी है।

संविधान और लोकतंत्र की शक्ति पर जोर

राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्रता मिलने के बाद भारत अपने राष्ट्रीय भाग्य का निर्माता बना और 26 जनवरी 1950 को संविधान के पूर्ण रूप से लागू होने के साथ देश ने लोकतांत्रिक गणतंत्र के रूप में नई पहचान हासिल की। उन्होंने कहा कि न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व जैसे संवैधानिक आदर्श ही हमारे गणतंत्र की आत्मा हैं।

वंदे मातरम और राष्ट्रभक्ति का संदेश

राष्ट्रपति ने ‘वंदे मातरम’ के ऐतिहासिक महत्व का उल्लेख करते हुए बताया कि यह गीत राष्ट्रीय चेतना और एकता का प्रतीक है। उन्होंने राष्ट्रवादी कवि सुब्रमण्यम भारती और बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय का उल्लेख करते हुए कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस का नारा ‘जय हिंद’ आज भी राष्ट्रीय गौरव और देशभक्ति की भावना को मजबूत करता है।

राष्ट्रपति ने प्रवासी भारतीयों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि वे देश की जड़ों से जुड़े रहते हुए भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा को बढ़ा रहे हैं। उन्होंने जैविक खेती, नवाचार, स्टार्टअप्स और सतत विकास को भारत के भविष्य के प्रमुख स्तंभ बताया।

महिला सशक्तिकरण और सामाजिक योगदान

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने महिला सशक्तिकरण पर विशेष जोर देते हुए कहा कि जन-धन खातों में 56 प्रतिशत खाते महिलाओं के हैं और देश में 10 करोड़ से अधिक सेल्फ हेल्प ग्रुप सक्रिय हैं। उन्होंने खेलों में महिलाओं की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा कि महिला क्रिकेट टीम ने आईसीसी वर्ल्ड कप और ब्लाइंड वर्ल्ड कप में शानदार प्रदर्शन किया है। नारी शक्ति अधिनियम से महिलाओं को और मजबूती मिलेगी।

आर्थिक विकास और वैश्विक लक्ष्य

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत विश्व की सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था है और तमाम वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद देश निरंतर प्रगति कर रहा है। उन्होंने भरोसा जताया कि भारत जल्द ही दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा।

देश सेवा में जुटे हर वर्ग की सराहना

अपने संबोधन के अंत में राष्ट्रपति ने किसानों, डॉक्टरों, नर्सों, स्वास्थ्यकर्मियों, पुलिसकर्मियों, इंजीनियरों, उद्यमियों और संवेदनशील नागरिकों की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि किसानों की मेहनत से भारत के कृषि उत्पाद विदेशों तक पहुंच रहे हैं और सभी वर्गों के सामूहिक प्रयासों से ही देश मजबूत बन रहा है।

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