डिजिटल डेस्क- पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल लगातार गरमाता जा रहा है। सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर अब चुनाव आयोग तक पहुंच गया है। दोनों दलों ने एक-दूसरे पर अभद्र भाषा, धमकी और अपमानजनक टिप्पणियों के आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई है, जिससे राज्य की सियासत में तनाव और बढ़ गया है। इस पूरे विवाद के केंद्र में पानीहाटी विधानसभा सीट है, जो इस बार खासा चर्चा में है। भाजपा ने यहां उस महिला को उम्मीदवार बनाया है, जो पिछले साल चर्चित आरजी कर अस्पताल कांड में दुष्कर्म और हत्या की शिकार डॉक्टर की मां हैं। इस फैसले के बाद यह सीट भावनात्मक और राजनीतिक दोनों स्तर पर अहम बन गई है।
सीएम ममता बनर्जी के खिलाफ टिप्पणी का आरोप
टीएमसी की ओर से कल्याण बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से शिकायत करते हुए भाजपा उम्मीदवार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि भाजपा उम्मीदवार ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ बेहद आपत्तिजनक और धमकी भरे बयान दिए हैं। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया कि इन टिप्पणियों में उनकी व्यक्तिगत सुरक्षा को लेकर भी खतरे की बात कही गई है। कल्याण बनर्जी ने इन बयानों को लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए खतरा बताते हुए चुनाव आयोग से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रिया के दौरान इस तरह की भाषा न केवल माहौल को विषाक्त बनाती है, बल्कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों की भावना को भी कमजोर करती है। टीएमसी ने इसे भाजपा की “डर और टकराव की राजनीति” का हिस्सा बताया है।
भाजपा ने लगाये गृहमंत्री के खिलाफ अभद्र टिप्पणी का आरोप
वहीं, टीएमसी की शिकायत के कुछ ही घंटों बाद भाजपा ने भी पलटवार करते हुए चुनाव अधिकारियों के समक्ष अपनी शिकायत दर्ज कराई। भाजपा ने आरोप लगाया कि कल्याण बनर्जी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ अभद्र, उत्तेजक और अपमानजनक टिप्पणियां की हैं। पार्टी ने एक वीडियो क्लिप भी साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया है। भाजपा का कहना है कि यह कोई एकल घटना नहीं, बल्कि टीएमसी नेताओं द्वारा लगातार की जा रही भड़काऊ बयानबाजी का हिस्सा है। पार्टी के मुताबिक, ऐसे बयान चुनावी माहौल को और अधिक ध्रुवीकृत कर रहे हैं और सामाजिक तनाव को बढ़ा रहे हैं। भाजपा ने चुनाव आयोग से कल्याण बनर्जी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है, जिसमें आचार संहिता के उल्लंघन का दोषी ठहराना और कानूनी कार्यवाही शुरू करना शामिल है।