बीएमसी चुनाव से पहले सियासी संग्राम तेज, उद्धव ठाकरे का बीजेपी पर तीखा हमला

KNEWS DESK- महाराष्ट्र में बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनाव से पहले राजनीतिक माहौल लगातार गरमाता जा रहा है। मतदान में अब महज चार दिन बचे हैं और इसी के साथ नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप की धार भी तेज हो गई है। इस बीच शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट के प्रमुख उद्धव ठाकरे ने भारतीय जनता पार्टी पर जोरदार हमला बोला है।

उद्धव ठाकरे ने बीजेपी नेता रावसाहेब दानवे के हालिया बयान पर पलटवार करते हुए कहा कि अगर शिवसेना प्रमुख दिवंगत बाल ठाकरे ने बीजेपी को “खाना नहीं खिलाया होता”, तो वह कुपोषण के कारण खत्म हो जाती। ठाकरे का यह बयान दानवे के उस कथन की प्रतिक्रिया में आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि “हर राजनीतिक पार्टी ने हमारी थाली से खाया है”, यानी किसी न किसी दौर में सभी दलों को बीजेपी से मदद मिली है।

इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा, “अगर बाल ठाकरे ने तुम्हें सहारा नहीं दिया होता, तो तुम कुपोषण से मर जाते। अगर ऐसा है तो आज तुम हमारी थाली का बचा हुआ खाना क्यों खा रहे हो? तुम्हारी भूख कभी खत्म ही नहीं होती, लगता है तुम्हें ‘भस्म्या’ की बीमारी हो गई है।” उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी लगातार शिवसेना के लोगों को तोड़ने की कोशिश कर रही है।

गौरतलब है कि 1990 के दशक में महाराष्ट्र में पहली बार बीजेपी सत्ता में तब आई थी, जब उसकी अविभाजित शिवसेना के साथ गठबंधन सरकार बनी थी और उस समय पार्टी की कमान बाल ठाकरे के हाथों में थी।

उद्धव ठाकरे ने बीएमसी चुनाव को लेकर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि मतदान से पहले यूपीआई के माध्यम से पैसे बांटे जा रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि सत्ताधारी पक्ष की कोशिश है कि विपक्ष का कोई भी मजबूत उम्मीदवार मैदान में न टिक पाए। ठाकरे ने कहा, “अगर पुलिस प्रशासन सच में सतर्क है, तो उसे इस पूरे मामले को गंभीरता से लेना चाहिए और निष्पक्ष जांच करनी चाहिए।”

उद्धव ठाकरे ने मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी से नाम और चुनाव चिन्ह छीन लिया गया, लेकिन जनता आज भी उनके साथ है। ठाकरे ने कहा, “हम एक नई शुरुआत कर रहे हैं, ठीक वैसे ही जैसे 1988 में की थी। आज हमारे पास कई नए चेहरे हैं, जो जनता की आवाज बनेंगे।”

ठाकरे ने छत्रपति संभाजी नगर के जल संकट का जिक्र करते हुए कहा कि शहर को साल में केवल 44 दिन ही पानी मिलता है। उन्होंने दावा किया कि अपने मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान राज्य सरकार ने शहर के लिए एक बड़ी पाइपलाइन परियोजना को पूरी तरह फंड देने का प्रस्ताव रखा था। “लेकिन मौजूदा सरकार ने इस परियोजना के लिए शहर को कर्ज लेने पर मजबूर कर दिया और इसके बावजूद यह योजना आज भी अधूरी है,” उन्होंने आरोप लगाया।

बीएमसी चुनाव से पहले इस तरह की बयानबाजी ने साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में महाराष्ट्र की राजनीति और अधिक गर्म होने वाली है।

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