नोए़डाः स्कूलों को धमकी भरे ई-मेल मामले में 6 आरोपी दबोचे, भारी इलेक्ट्रॉनिक सामान बरामद

डिजिटल डेस्क- उत्तर प्रदेश एसटीएफ को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। एसटीएफ ने नोएडा से संचालित एक संगठित साइबर गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए उसके छह सदस्यों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह ऑनलाइन बेटिंग ऐप के जरिए लोगों से ठगी कर रहा था। जांच में यह भी सामने आया है कि यही गिरोह नोएडा के विभिन्न स्कूलों को धमकी भरे ई-मेल भेजने की साजिश में भी शामिल था। एसटीएफ अधिकारियों के मुताबिक, 23 जनवरी 2026 को गौतमबुद्ध नगर के कई स्कूलों को धमकी भरे ई-मेल प्राप्त हुए थे। इस मामले में साइबर क्राइम थाना सूरजपुर में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई थी। तकनीकी जांच के दौरान ई-मेल से जुड़े रिकवरी ई-मेल की लोकेशन गौतमबुद्ध नगर क्षेत्र में मिली, जिसके आधार पर एसटीएफ ने संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी की।

फर्जी दस्तावेज और इलेक्ट्रानिक उपकरण बरामद

छापेमारी के दौरान पुलिस को भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और फर्जी दस्तावेज मिले। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान अनंत कुमार (आगरा), अमीष जंग कारकी (नेपाल), दिव्यांशु (बिहार), लेखनाथ शर्मा (नेपाल), केदारनाथ (नेपाल) और साहिल कुमार (बिहार) के रूप में हुई है। एसटीएफ ने इनके कब्जे से चार लैपटॉप, 22 मोबाइल फोन, दो नेपाली पासपोर्ट, दो फर्जी आधार कार्ड और कई अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए हैं। जांच में खुलासा हुआ है कि गिरोह के कुछ सदस्य ऑस्ट्रेलिया और नेपाल से बीबीए/एमबीए की पढ़ाई कर चुके हैं और सभी को टेक सपोर्ट व कॉल सेंटर संचालन का अनुभव था। इसी तकनीकी दक्षता का इस्तेमाल कर वे ऑनलाइन बेटिंग ऐप के जरिए लोगों को लालच देकर ठगी का शिकार बनाते थे। बताया जा रहा है कि यह गैंग वर्ष 2023 से सक्रिय था और अब तक कई लोगों को करोड़ों रुपये का चूना लगा चुका है।

सोशल मीडिया में बेटिंग ऐप डाउनलोड करवाकर करता था ठगी

एसटीएफ अधिकारियों का कहना है कि गिरोह बेहद संगठित तरीके से काम करता था। पहले सोशल मीडिया और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों को बेटिंग ऐप डाउनलोड करने के लिए प्रेरित किया जाता था, फिर फर्जी जीत और बोनस का झांसा देकर उनसे बड़ी रकम निवेश करवाई जाती थी। जब पीड़ित अधिक रकम जमा कर देते थे, तो उनके अकाउंट ब्लॉक कर दिए जाते थे। धमकी भरे ई-मेल मामले में भी इसी गिरोह की संलिप्तता सामने आने से जांच एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपियों के तार किन-किन राज्यों और देशों तक जुड़े हैं। साथ ही उनके बैंक खातों और डिजिटल लेनदेन की भी गहन जांच की जा रही है।

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